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Shri Ganesha Stotram: आज गणपति को प्रसन्न करने के लिए करें श्रीगणेश स्तोत्रम् पाठ, मिलेगी सुख-समृद्धि

Shri Ganesha Stotram: आज गणपति को प्रसन्न करने के लिए करें श्रीगणेश स्तोत्रम् पाठ, मिलेगी सुख-समृद्धि

बुधवार के दिन गणेश जी की स्तुति करने से सारे कष्ट दूर होते हैं.

बुधवार के दिन गणेश जी की स्तुति करने से सारे कष्ट दूर होते हैं.

Shri Ganesha Stotram: बुधवार के दिन भगवान श्री गणेश जी (Lord Ganesha) की आराधना की जाती है और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बुधवार का व्रत (Budhwar Vrat) भी रख जाता है। हिन्दू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य की सफलता के लिए सर्वप्र​थम विघ्नहर्ता श्री गणेश जी का आह्वान किया जाता है।

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    Shri Ganesha Stotram: बुधवार के दिन भगवान श्री गणेश जी (Lord Ganesha) की आराधना की जाती है और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बुधवार का व्रत (Budhwar Vrat) भी रख जाता है। हिन्दू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य की सफलता के लिए सर्वप्र​थम विघ्नहर्ता श्री गणेश जी का आह्वान किया जाता है। आज बुधवार के दिन आप गणेश जी को प्रसन्न करने और कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए आप श्रीगणेश स्तोत्रम् का पाठ कर सकते हैं। बुधवार के दिन आप सुबह या शाम को गणेश जी की पूजा करें। उनको दूर्वा अर्पित करें एवं मोदक का भोग लगाएं, फिर सच्चे मन से श्रीगणेश स्तोत्रम् का पाठ करें।

    नारद जी ने किया था श्रीगणेश स्तोत्रम् पाठ
    सर्वप्रथम देवर्षि नारद जी ने श्रीगणेश स्तोत्रम् का पाठ किया था। नारण पुराण में श्रीगणेश स्तोत्रम् का वर्णन मिलता है। श्रीगणेश स्तोत्रम् को गणप​ति संकटनाशन स्तोत्र भी कहते हैं। जीवन से संकटों को दूर करने के लिए इसका पाठ किया जाता है। गणपति के कृपा से व्यक्ति के सभी कष्ट मिट जाते हैं, जीवन में सुख और समृद्धि आती है। शुभता का प्रभाव बढ़ता है।

    श्रीगणेश स्तोत्रम् पाठ
    प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम।
    भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये।।

    प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम।
    तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम।।

    लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च।
    सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम्।।

    नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम।
    एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम।।

    द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर:।
    न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो।।

    विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
    पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्।।

    जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत्।
    संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय:।।

    अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत।
    तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत:।।

    श्रीगणेश स्तोत्रम् पाठ करने के बाद गणेश जी को प्रणाम करते हैं और उनके समक्ष अपनी मनोकामना व्यक्त कर देते हैं। पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना भी कर लेना चाहिए।

    (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

    Tags: Dharma Aastha, Ganesh, Spirituality

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