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श्री जगन्नाथ मंदिरः भगवान श्रीकृष्ण के इस धाम के अब होंगे आसानी से दर्शन, Online करें ये काम

News18Hindi
Updated: December 21, 2019, 1:02 PM IST
श्री जगन्नाथ मंदिरः भगवान श्रीकृष्ण के इस धाम के अब होंगे आसानी से दर्शन, Online करें ये काम
भगवान जगन्नाथ की इंद्रनील या नीलमणि से निर्मित मूल मूर्ति, एक अगरु वृक्ष के नीचे मिली थी.

श्री जगन्नथपुरी पहले नील माघव के नाम से पुजे जाते थे, जो भील सरदार विश्वासु के आराध्य देव थे. अब से लगभग हजारों वर्ष पुर्व भील सरदार विष्वासु नील पर्वत की गुफा के अंदर नील माघव जी की पुजा किया करते थे.

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  • Last Updated: December 21, 2019, 1:02 PM IST
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पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर एक हिंदू मंदिर है, जो भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है. यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है, जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है. इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है. इस मंदिर को हिंदुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है. यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है.

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इस मंदिर का वार्षिक रथ यात्रा उत्सव प्रसिद्ध है. इसमें मंदिर के तीनों मुख्य देवता, भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीनों, तीन अलग-अलग भव्य और सुसज्जित रथों में विराजमान होकर नगर की यात्रा को निकलते हैं. श्री जगन्नथपुरी पहले नील माघव के नाम से पुजे जाते थे, जो भील सरदार विश्वासु के आराध्य देव थे. अब से लगभग हजारों वर्ष पुर्व भील सरदार विष्वासु नील पर्वत की गुफा के अंदर नील माघव जी की पुजा किया करते थे.

मंदिर का उद्गम



गंगवंश के हाल ही में अन्वेषित ताम्र पत्रों से यह ज्ञात हुआ है कि वर्तमान मंदिर के निर्माण कार्य को कलिंग राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने आरंभ कराया था. मंदिर के जगमोहन और विमान भाग इनके शासन काल में बने थे. फिर सन 1197 में जाकर ओडिआ शासक अनंग भीम देव ने इस मंदिर को वर्तमान रूप दिया था. मंदिर में जगन्नाथ अर्चना सन 1558 तक होती रही. इस वर्ष अफगान जनरल काला पहाड़ ने ओडिशा पर हमला किया और मूर्तियां तथा मंदिर के भाग ध्वंस किए और पूजा बंद करा दी, तथा विग्रहों को गुप्त मे चिलिका झील मे स्थित एक द्वीप मे रखा गया. बाद में, रामचंद्र देव के खुर्दा में स्वतंत्र राज्य स्थापित करने पर, मंदिर और इसकी मूर्तियों की पुनर्स्थापना हुई.

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
इस मंदिर के उद्गम से जुड़ी परंपरागत कथा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की इंद्रनील या नीलमणि से निर्मित मूल मूर्ति, एक अगरु वृक्ष के नीचे मिली थी. यह इतनी चकाचौंध करने वाली थी, कि धर्म ने इसे पृथ्वी के नीचे छुपाना चाहा. मालवा नरेश इंद्रद्युम्न को स्वप्न में यही मूर्ति दिखाई दी थी. तब उसने कड़ी तपस्या की और तब भगवान विष्णु ने उसे बताया कि वह पुरी के समुद्र तट पर जाएं और उसे एक लकड़ी का लठ्ठा मिलेगा. उसी लकड़ी से वह मूर्ति का निर्माण कराए. राजा ने ऐसा ही किया और उसे लकड़ी का लठ्ठा मिल भी गया. उसके बाद राजा को विष्णु और विश्वकर्मा बढ़ई कारीगर और मूर्तिकार के रूप में मिले.

उन्होंने यह शर्त रखी कि वह एक माह में मूर्ति तैयार कर देंगे लेकिन तब तक वह एक कमरे में बंद रहेंगे और राजा या कोई भी उस कमरे के अंदर नहीं आएगें. माह के अंतिम दिन जब कई दिनों तक कोई भी आवाज नहीं आई तो उत्सुकता वश राजा ने कमरे में झांका और वह वृद्ध कारीगर द्वार खोलकर बाहर आ गया और राजा से कहा, कि मूर्तियां अभी अपूर्ण हैं, उनके हाथ अभी नहीं बने थे. राजा के अफसोस करने पर, मूर्तिकार ने बताया, कि यह सब दैववश हुआ है और यह मूर्तियां ऐसे ही स्थापित होकर पूजी जाएंगीं. तब वही तीनों जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां मंदिर में स्थापित की गईं.

मंदिर का वृहत क्षेत्र 400,000 वर्ग फुट में फैला है और चहारदीवारी से घिरा है. कलिंग शैली के मंदिर स्थापत्यकला और शिल्प के आश्चर्यजनक प्रयोग से परिपूर्ण, यह मंदिर, भारत के भव्यतम स्मारक स्थलों में से एक है. मुख्य मंदिर वक्ररेखीय आकार का है, जिसके शिखर पर विष्णु का श्री सुदर्शन चक्र (आठ आरों का चक्र) मंडित है. इसे नीलचक्र भी कहते हैं. यह अष्टधातु से निर्मित है और पवित्र माना जाता है. मंदिर का मुख्य ढांचा एक 214 फीट ऊंचे पाषाण चबूतरे पर बना है. इसके भीतर आंतरिक गर्भगृह में मुख्य देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं.

श्री जगन्नाथ भगवान के दर्शन
आमतौर पर ये माना जाता है कि श्री जगन्नाथ मंदिर में लोगों को दर्शन करने में कई घंटों का समय लग जाता है क्योंकि धाम होने के कारण इस मंदिर में लाखों लोग दर्शन करने आते हैं. आइए हम आपको बताते हैं उन आसान तरीकों के बारे में जिससे आप इस मंदिर में बड़ी ही आसानी से भगवान के दर्शन कर सकते हैं और इसमें आपको ज्यादा समय भी नहीं गंवाना पड़ेगा.

1. ऑनलाइन बुकिंग (Online booking)
आप श्री जगन्नाथ मंदिर के ऑफिशियल वेबसाइट http://www.jagannath.nic.in/?q=home पर जाकर स्पेशल दर्शन या सेवा के लिए पहले से ही अपनी बुकिंग करा सकते हैं, जिससे आपकी यात्रा आसान हो जाएगी. यहां आप मंदिर के गेस्ट हाउस में ठहरने की बुकिंग भी करवा सकते हैं.

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2. सिफारिशी पत्र (VIP recommendation letter)
जिन यात्रियों को ऑनलाइन बुकिंग नहीं मिलती है वो अपने जनप्रतिनिधि जिसमें सांसद, मंत्री और विधायक शामिल हैं, के सिफारिशी पत्र पर भी प्राथमकिता के आधार पर दर्शन की पर्ची पा सकते हैं. इसके लिए उन्हें अपना पत्र को अध्यक्ष, श्री जगन्नाथ मंदिर के नाम से दर्शन के एक दिन पहले तक जमा कराना होगा. उपलब्धता के आधार पर आपको टिकट आंवटित कर दिया जाता है. किस सेवा का कितना रेट है ये डिटेल आप बेबसाइट पर आसानी से जान सकते हैं.

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First published: December 21, 2019, 1:01 PM IST
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