Jyotirlinga: भगवान शिव का 12वां ज्योतिर्लिंग है घृष्णेश्वर, यहां भक्त के कहने पर विराजे थे शिव

Jyotirlinga: भगवान शिव का 12वां ज्योतिर्लिंग है घृष्णेश्वर, यहां भक्त के कहने पर विराजे थे शिव
सावन में ज्योतिर्लिंगों की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है.

Jyotirlinga Temples Of India: सावन मास भगवान शिव को समर्पित है. महीने में शिव की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है. इस महीने में ज्योर्लिंगों की पूजा करना हर मनोकामना पूरी होती है. आइए आज हम आपको शिव जी के 12वें ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर मंदिर के बारे में बताते हैं...

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Grishneshwar Jyotirlinga Temple: भगवान शिव का 12वीं ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर मंदिर महाराष्ट्र में औरंगाबाद के नजदीक दौलताबाद में स्थित है. इसे घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है. घृष्णेश्वर मंदिर मंदिर का निर्माण 18 वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था. यह भगवान शिव का अंतिम 12वां ज्योतिर्लिंग है. हिंदू मान्यता के अनुसार सावन के महीने में यहां पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. शिव भक्तों की इस ज्योतिर्लिंग पर अट्टू आस्था है. सावन के महीने में लाखों का तादात में यहां भक्त पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं. इस बार कोरोना महामारी के कारण भीड़ में कुछ कमी देखने को मिल रही है. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का वर्णन शिवमहापुराण में भी मिलता है.

क्या है पौराणिक कथा में वर्णन
पौराणिक कथा के अनुसार घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग में आने हर भक्त की मनोकामना को भगवान शिव पूर्ण करते हैं. एक कथा की मानें तो देवगिरि पर्वत के पास सुधर्मा अपनी पत्नी सुदेहा के साथ निवास करते थे. दोनों का जीवन अच्छे से गुजर रहा था, लेकिन इन दोनों को कोई संतान नहीं थी. इस बात को लेकर पति-पत्नी दोनों परेशान रहते थे. सुधर्मा ज्योतिष शास्त्र के भी विद्वान थे. उन्होंने पत्नी की जन्म कुंडली पढ़ी तो पता चला कि सुदेहा संतानोत्पत्ति नहीं कर सकती है. जबकि सुदेहा संतान की प्रबल इच्छा रखती थी. सुदेहा को यह बात पता चली तो उसे बहुत दुख हुआ.

एक दिन सुदेहा ने सुधर्मा से अपनी छोटी बहन घुष्मा से दूसरा विवाह करने की बात कही. पहले तो इस सुधर्मा ने सुझाव को नकार दिया लेकिन बाद में मान गई. कुछ दिनों बाद सुधर्मा पत्नी की छोटी बहन से विवाह कर घर ले आए. घुष्मा शिव की परम भक्त थी. उसे विवाह के बाल सुंदर बच्चा हुआ. लेकिन इसके बाद सुदेहा के मन में नकारात्मक विचार पनपने लगे. इसी के चलते उसने एक दिन घुष्मा के युवा पुत्र को रात में सोते समय मार डाला और शव को तालाब में फेंक दिया. इसी तलाव में घुष्मा भगवान शिव के पार्थिव शिवलिंगों को बहाती थी.
घुष्मा को भगवान शिव ने दिये दर्शन


पुत्र की मौत पर परिवार में शोक की लहर दौड़ गई. घुष्मा को भगवान शिव पर पूरा विश्वास था. रोज की भांति घुष्मा ने उसी तलाव के किनारे 100 शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा प्रारंभ की, थोड़ी देर बाद ही तालाब से उसका पुत्र आता दिखाई दिया. घुष्मा ने जैसे ही पूजा समाप्त की भगवान शिव प्रकट हुए और बहन को दंड देने की बात कही. लेकिन घुष्मा ने ऐसा नहीं करने की भगवान से प्रार्थना की. इस बात से शिवजी अत्यंत प्रसन्न हुए और वरदान मांगने का कहा. तब घुष्मा ने भगवान शिव से इसी स्थान पर निवास करने के लिए कहा. भगवान ने कहा ऐसा ही होगा. तब से यह स्थान घुष्मेश्वर के नाम से जाना जाता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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