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आज शुक्र प्रदोष व्रत के दिन पढ़ें यह कथा, मिलेगा सुख, समृद्धि एवं सौभाग्य

वैशाख माह का शुक्र प्रदोष व्रत 13 मई दिन शुक्रवार को है.

वैशाख माह का शुक्र प्रदोष व्रत 13 मई दिन शुक्रवार को है.

वैशाख माह का शुक्र प्रदोष व्रत (Shukra Pradosh Vrat) आज 13 मई को है. शुक्र प्रदोष व्रत करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है. आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत की कथा एवं महत्व के बारे में.

वैशाख माह का शुक्र प्रदोष व्रत आज 13 मई दिन शुक्रवार को है. यह मई माह का पहला प्रदोष व्रत है. हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है और शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा की जाती है. भगवान शिव के आशीर्वाद से सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है. शुक्र प्रदोष व्रत करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, समस्याओं का समाधान होता है. प्रदोष व्रत करने से धन, धान्य, पुत्र, आरोग्य आदि की भी प्राप्ति होती है. शुक्र प्रदोष व्रत के दिन पूजा के समय व्रत कथा का पाठ करना चाहिए. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत (Shukra Pradosh Vrat) की कथा के बारे में.

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शुक्र प्रदोष व्रत कथा

एक नगर में 3 दोस्त रहते थे. एक राजकुमार, एक ब्राह्मण कुमार और एक धनिक कुमार था. राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे, जबकि धनिक कुमार का अभी गौना नहीं हुआ था. एक दिन तीनों ही दोस्त स्त्रियों के बारे में बातें कर रहे थे. एक ने कहा कि स्त्री के बिना तो घर भूतों का डेरा जैसा है. धनिक कुमार ने यह बात सुनीं, तो उसने तुरंत गौना कराकर पत्नी को घर लाने का फैसला किया.

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उसे गौना कराने के लिए अपने मां बाप से कहा. उन्होंने कहा कि शुक्र देव अभी अस्त हैं, ऐसे में गौना कराना शुभ नहीं है, लेकिन वह नहीं माना और ससुराल पहुंच गया. वहां पर भी लोगों ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह जिद पर अड़ा रहा.

यह देखकर कन्या के माता पिता ने उसे दामाद के साथ विदा कर दिया. वे जैसे ही बैलगाड़ी पर सवार होकर नगर से बाहर निकले, वैसे ही बैलगाड़ी का एक पहिया टूट गया और बैल की एक टांग भी टूट गई. धनिक कुमार और उसकी पत्नी को भी चोट आई, लेकिन वे चलते रहे.

कुछ दूर जाने पर डाकुओं ने उन पर हमला कर दिया. वे उनका सबकुछ लूट ले गए. जैसे तैसे वे दोनों घर पहुंचे, तो वहां पर धनिक कुमार को सांप ने डस लिया. वैद्य ने उसकी हालत देखी और कहा कि यह 3 दिन में मर जाएगा.

इस बात की सूचना ब्राह्मण कुमार को मिली, तो वह मित्र के पहुंचा और उसके माता पिता से शुक्र प्रदोष व्रत रखने को कहा और धनिक पुत्र को पत्नी के साथ ससुराल भेजने का सुझाव दिया. धनिक पुत्र ने वैसा ही किया और ससुराल पहुंच गया. विधिपूर्वक शुक्र प्रदोष व्रत रखा. शिव कृपा से उसकी हालत ठीक होने लगी और सभी कष्ट भी दूर हो गए. उसके जीवन में सुख एवं समृद्धि आ गई.

इस प्रकार से जो भी शुक्र प्रदोष व्रत रखता है और कथा का पाठ करता है, उसके दुख दूर होते हैं. जीवन खुशहाल होता है. सुख एवं सौभाग्य बढ़ता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

Tags: Dharma Aastha, Lord Shiva

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