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रत्न के टूटने पर क्या होता है और दूसरे का रत्न क्यों नहीं करना चाहिए धारण? जानें इन सवालों के जवाब

अच्छी गुणवत्ता का रत्न धारण करना चाहिए. Image-shutterstock

अच्छी गुणवत्ता का रत्न धारण करना चाहिए. Image-shutterstock

नवरत्नों के प्रभाव से मनुष्य के जीवन में आ रहे उतार-चढ़ाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. रत्नों को धारण करने ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

रत्नों के प्रभाव से जीवन में आ रहे उतार-चढ़ाव को नियंत्रित कर सकते हैं.
रत्नों को धारण करने पर कई सावधानियां बरतनी भी ज़रूरी है.

जिस तरह मनुष्य की कुंडली में नव ग्रहों का महत्व है. उसी तरह ग्रहों से निकली रश्मियों को एकत्रित करने की क्षमता नवरत्नों में पाई जाती है. वैसे तो रत्न अनेक प्रकार के होते हैं परंतु मुख्यत: नौ रत्नों को ही प्राथमिकता दी जाती है. ये रत्न मनुष्य की कुंडली में मौजूद ग्रहों के दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम करने के लिए पहने जाते हैं. हालांकि, रत्न धारण करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है. रत्नों को लेकर मनुष्य के मन में कई सवाल आते हैं, उन्हीं में से कुछ सवालों के जवाब हमें दे रहे हैं भोपाल के रहने वाले ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा आइए जानते हैं.

विशेषज्ञ की सलाह पर जातक रत्न धारण तो कर लेता है, परंतु उसके मन में रत्नों से जुड़े कई सवाल होते हैं, जिनके विषय में हर व्यक्ति जानना चाहता है.

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रत्न के खो जाने, टूट जाने या दरार आने पर क्या होता है?

ज्योतिष शास्त्र और रत्न शास्त्र के अनुसार, यदि आपने कोई रत्न पहना है और वह टूट गया है या फिर चटक गया है, तो इसे अशुभ माना जाता है. इसके उपाय के तौर पर उपयुक्त ग्रह शांति करानी चाहिए. इसके अलावा नया बड़ा और अच्छी गुणवत्ता का रत्न धारण करना इसका समाधान माना जाता है. वहीं, जो रत्न आपने पहना है यदि वह खो जाता है तो उसे शुभ माना जाता है. इसका संकेत है कि आपका वह ग्रह दोष दूर हो गया है. यदि आपको कोई रत्न मिलता है तो इसे अशुभ माना जाता है. इसको लेकर मान्यता है कि जिसका रत्न खोया है उसके कष्ट आप पर आ सकते हैं.

रत्न को अंगूठी या लॉकेट में धारण करने में क्या अंतर है?

हमारे शरीर को संचालित करने वाले मस्तिष्क के विशेष केंद्र बिंदु हमारी उंगलियों पर मौजूद होते हैं, इसलिए यदि कोई रत्न किसी विशेष उंगली में धारण किया जाता है तो उसका अधिक प्रभाव होता है. वहीं, यदि यह रत्न लॉकेट के रूप में धारण किया जाता है तो उतना प्रभावी नहीं होता. इसके लिए अंगूठी में धारण किए रत्न के दोगुने वजन का रत्न धारण करने पर उसका पूर्ण प्रभाव प्राप्त होता है.

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दूसरों का पहना रत्न पहनना चाहिए?

कभी भी दूसरों का पहना रत्न खुद नहीं पहनना चाहिए, क्योंकि उस व्यक्ति के ग्रहों के शुभ अशुभ प्रभाव उस रत्न में अवशोषित हो चुके होते हैं. यदि आपको दूसरे का रत्न पहनना है तो नजदीकी रिश्तेदार का धारण करें. इसे अपने माता-पिता या पति-पत्नी का पहना हुआ रत्न आप धारण कर सकते हैं. इसे धारण से पहले पूरी तरह शुद्ध करना आवश्यक है.

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Religion

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