Sita Navami 2021: सीता नवमी आज, पढ़ें पौराणिक कथा

सीता नवमी के दिन ही मां सीता धरती से प्रकट हुईं थीं (credit: shutterstock/Suman1122)

Sita Navami 2021 Katha: वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं. इसीलिए इस दिन को जानकी नवमी के नाम से जाना जाता है.

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    Sita Navami 2021 Katha: आज 21 अप्रैल, शुक्रवार को सीता नवमी है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सीता नवमी के दिन सीता मां का जन्म हुआ था. मान्यताओं के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं. इसीलिए इस दिन को जानकी नवमी के नाम से जाना जाता है. आज भक्त अपने घर पर ही मां सीता की पूजा अर्चना करेंगे. पूजा पाठ और व्रत में लॉकडाउन के सभी नियमों का पालन करें. इस दिन लोग अपने जीवनसाथी की आयु के लिए व्रत (Vrat) रखती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं. मान्‍यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से कई तीर्थयात्राओं के बराबर फल की प्राप्ति होती है. सीता नवमी पर पढ़ें पौराणिक कथा ...

    सीता नवमी पौराणिक कथा :

    पौराणिक कथा के अनुसार मारवाड़ क्षेत्र में एक वेदवादी श्रेष्ठ धर्मधुरीण ब्राह्मण निवास करते थे. उनका नाम देवदत्त था. उन ब्राह्मण की बड़ी सुंदर रूपगर्विता पत्नी थी, उसका नाम शोभना था. ब्राह्मण देवता जीविका के लिए अपने ग्राम से अन्य किसी ग्राम में भिक्षाटन के लिए गए हुए थे. इधर ब्राह्मणी कुसंगत में फंसकर व्यभिचार में प्रवृत्त हो गई.

    अब तो पूरे गांव में उसके इस निंदित कर्म की चर्चाएं होने लगीं. परंतु उस दुष्टा ने गांव ही जलवा दिया. दुष्कर्मों में रत रहने वाली वह दुर्बुद्धि मरी तो उसका अगला जन्म चांडाल के घर में हुआ. पति का त्याग करने से वह चांडालिनी बनी, ग्राम जलाने से उसे भीषण कुष्ठ हो गया तथा व्यभिचार-कर्म के कारण वह अंधी भी हो गई. अपने कर्म का फल उसे भोगना ही था.

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    इस प्रकार वह अपने कर्म के योग से दिनों दिन दारुण दुख प्राप्त करती हुई देश-देशांतर में भटकने लगी. एक बार दैवयोग से वह भटकती हुई कौशलपुरी पहुंच गई. संयोगवश उस दिन वैशाख मास, शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि थी, जो समस्त पापों का नाश करने में समर्थ है.

    सीता (जानकी) नवमी के पावन उत्सव पर भूख-प्यास से व्याकुल वह दुखियारी इस प्रकार प्रार्थना करने लगी- हे सज्जनों! मुझ पर कृपा कर कुछ भोजन सामग्री प्रदान करो. मैं भूख से मर रही हूं- ऐसा कहती हुई वह स्त्री श्री कनक भवन के सामने बने एक हजार पुष्प मंडित स्तंभों से गुजरती हुई उसमें प्रविष्ट हुई. उसने पुनः पुकार लगाई- भैया! कोई तो मेरी मदद करो- कुछ भोजन दे दो.

    इतने में एक भक्त ने उससे कहा- देवी! आज तो सीता नवमी है, भोजन में अन्न देने वाले को पाप लगता है, इसीलिए आज तो अन्न नहीं मिलेगा. कल पारणा करने के समय आना, ठाकुर जी का प्रसाद भरपेट मिलेगा, किंतु वह नहीं मानी. अधिक कहने पर भक्त ने उसे तुलसी एवं जल प्रदान किया. वह पापिनी भूख से मर गई. किंतु इसी बहाने अनजाने में उससे सीता नवमी का व्रत पूरा हो गया.

    अब तो परम कृपालिनी ने उसे समस्त पापों से मुक्त कर दिया. इस व्रत के प्रभाव से वह पापिनी निर्मल होकर स्वर्ग में आनंदपूर्वक अनंत वर्षों तक रही. तत्पश्चात् वह कामरूप देश के महाराज जयसिंह की महारानी काम कला के नाम से विख्यात हुई. जातिस्मरा उस महान साध्वी ने अपने राज्य में अनेक देवालय बनवाए, जिनमें जानकी-रघुनाथ की प्रतिष्ठा करवाई. इस दिन जानकी स्तोत्र, रामचंद्रष्टाकम्, रामचरित मानस आदि का पाठ करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
    Published by:Bhagya Shri Singh
    First published: