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Skand Shashthi 2022: कब है स्कन्द षष्ठी व्रत? जानें मुहूर्त और इस व्रत को रखने का महत्व

 हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कन्द षष्ठी व्रत रखा जाता है. (Photo: Pixabay)

हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कन्द षष्ठी व्रत रखा जाता है. (Photo: Pixabay)

आषाढ़ माह की स्कन्द षष्ठी (Skand Shashthi) व्रत 04 जुलाई को है. इस व्रत को करने से संतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान होता है. संतान का जीवन सुखमय होता है.

आषाढ़ माह की स्कन्द षष्ठी व्रत 04 जुलाई दिन सोमवार को है. हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कन्द षष्ठी (Skand Shashthi) व्रत रखा जाता है. इस दिन स्कंद कुमार यानी भगवान कार्तिकेय की पूजा विधि विधान से करते हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट बताते हैं कि स्कन्द षष्ठी व्रत को संतान षष्ठी भी कहते हैं. स्कंद पुराण में स्कन्द षष्ठी व्रत का महत्व बताया गया है. इस व्रत को करने से संतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान होता है. संतान का जीवन सुखमय होता है. इस व्रत को आप चैत्र, आश्विन और कार्तिक माह से प्रारंभ करते हैं, तो अच्छा माना जाता है. आइए जानते हैं स्कन्द षष्ठी व्रत की ति​थि और पूजा मुहूर्त के बारे में.

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स्कन्द षष्ठी व्रत 2022 तिथि
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का प्रारंभ 04 जुलाई दिन सोमवार को शाम 06 बजकर 32 मिनट से हो रहा है. यह तिथि 05 जुलाई दिन मंगलवार को शाम 07 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी. शाम के समय में पूजा मुहूर्त 04 जुलाई को है, ऐसे में इस दिन ही व्रत किया जाएगा.

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स्कन्द षष्ठी 2022 मुहूर्त
इस माह के स्कन्द षष्ठी व्रत के दिन सिद्धि योग और रवि योग बना रहा है. सिद्धि योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक है, वहीं रवि योग प्रात: 08 बजकर 44 मिनट से अगले दिन 05 जुलाई को प्रात: 05 बजकर 28 मिनट तक है.

रवि योग और सिद्धि योग मांगलिक कार्यों के लिए अच्छे होते हैं. सिद्धि योग कार्यों में सफलता की संभावनाओं को बढ़ाने वाला है. इस दिन का राहुकाल सुबह 07 बजकर 12 मिनट से सुबह 08 बजकर 57 मिनट तक है. राहुकाल में मांगलिक कार्य न करें.

स्कन्द षष्ठी का महत्व
इस व्रत को करने से संतान को सुख और आरोग्य प्राप्त होता है. स्कन्द षष्ठी व्रत की कथा के अनुसार, च्यवन ऋषि के आंखों की रोशनी चली गई थी, तो उन्होंने यह व्रत रखा था और स्कंद कुमार की पूजा की थी. व्रत के पुण्य प्रभाव से उनके आंखों की रोशनी वापस आ गई. दूसरी कथा में बताया गया है कि प्रियव्रत का मृत बच्चा दोबारा जीवत हो उठा था.

Tags: Dharma Aastha, Spirituality

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