• Home
  • »
  • News
  • »
  • dharm
  • »
  • Surya Dev Worship: रविवार को करें सूर्य चालीसा का पाठ, बढ़ेगी जीवनीशक्ति, पूरी होगी मनोकामना

Surya Dev Worship: रविवार को करें सूर्य चालीसा का पाठ, बढ़ेगी जीवनीशक्ति, पूरी होगी मनोकामना

सूर्य की उपासना अति शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है.

सूर्य की उपासना अति शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है.

Surya Dev Worship: जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर...

  • Share this:
    Surya Dev Worship: रविवार (Sunday) के दिन सूर्य देव की पूजा का विधान है. हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव प्रत्यक्ष रूप से दर्शन देबे वाले देवता हैं. सूर्य की पूजा से जीवनशक्ति, मानसिक शांति, ऊर्जा और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि लोग उगते हुए सूर्य को देखना शुभ मानते हैं और सूर्य को अर्घ्य देना शुभ मानते हैं. एक अन्य मान्यता यह भी है कि रविवार के दिन सूर्य देव का व्रत रखने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं. माना जाता है कि

    श्री सूर्य चालीसा


    दोहा -


    कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अड्ग ।

    कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अड्ग ।
    पद्मासन स्थित ध्याइये, शंख चक्र के सड्ग ॥

    चौपाई -


    जय सविता जय जयति दिवाकर । सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर ॥
    भानु पतंग मरीची भास्कर सविता । हंस सुनूर विभाकर ॥

    विवस्वान आदित्य विकर्तन । मार्तण्ड हरिरूप विरोचन ॥
    अम्बरमणि खग रवि कहलाते । वेद हिरण्यगर्भ कह गाते ॥

    सहस्त्रांशुप्रद्योतन कहि कहि । मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि ॥
    अरुण सदृश सारथी मनोहर । हाँकत हय साता चढ़ि रथ पर ॥

    मंडल की महिमा अति न्यारी । तेज रूप केरी बलिहारी ॥
    उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते । देखि पुरंदर लज्जित होते ॥

    मित्र मरीचि भानु । अरुण भास्कर सविता ॥
    सूर्य अर्क खग । कलिकर पूषा रवि ॥

    आदित्य नाम लै । हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै ॥
    द्वादस नाम प्रेम सों गावैं । मस्तक बारह बार नवावै ॥

    चार पदारथ सो जन पावै । दुःख दारिद्र अध पुञ्ज नसावै ॥
    नमस्कार को चमत्कार यह । विधि हरिहर कौ कृपासार यह ॥

    सेवै भानु तुमहिं मन लाई । अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई ॥
    बारह नाम उच्चारन करते । सहस जनम के पातक टरते ॥

    उपाख्यान जो करते तवजन । रिपु सों जमलहते सोतेहि छन ॥
    छन सुत जुत परिवार बढतु है । प्रबलमोह को फँद कटतु है ॥

    अर्क शीश को रक्षा करते । रवि ललाट पर नित्य बिहरते ॥
    सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत । कर्ण देस पर दिनकर छाजत ॥

    भानु नासिका वास रहु नित । भास्कर करत सदा मुख कौ हित ॥
    ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे । रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे ॥

    कंठ सुवर्ण रेत की शोभा । तिग्मतेजसः कांधे लोभा ॥
    पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर । त्वष्टा वरुण रहम सुउष्णाकर ॥

    युगल हाथ पर रक्षा कारन । भानुमान उरसर्म सुउदरचन ॥
    बसत नाभि आदित्य मनोहर । कटि मंह हँस रहत मन मुदभर ॥

    जंघा गोपति सविता बासा । गुप्त दिवाकर करत हुलासा ॥
    विवस्वान पद की रखवारी । बाहर बसते नित तम हारी ॥

    सहस्त्रांशु सर्वांग सम्हारै । रक्षा कवच विचित्र विचारे ॥
    अस जोजन अपने मन माहीं । भय जग बीज करहुँ तेहि नाहीं ॥

    दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुँ न व्यापै । जोजन याको मनमहं जापै ॥
    अंधकार जग का जो हरता । नव प्रकाश से आनन्द भरता ॥

    ग्रह गन ग्रिस न मिटावत जाही । कोटि बार मैं प्रनवौं ताही ॥
    मन्द सदृश सुतजग में जाके । धर्मराज सम अद्भुत बाँके ॥

    धन्य धन्य तुम दिनमनि देवा । किया करत सुरमुनि नर सेवा ॥
    भक्ति भावतुत पूर्ण नियमसों । दूर हटतसो भवके भ्रमसों ॥

    परम माघ महं सूर्य फाल्गुन । मध वेदांगनाम रवि गावै ॥
    भानु उदय वैसाख गिनावै । ज्येष्ट इन्द्र आषाढ़ रवि गावै ॥

    यह भादों आश्विन हिमरेता । कातिक होत दिवाकर नेता ॥
    अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं । पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं ॥

    Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज