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Surdas Jayanti: बिना दृष्टि के ही रच डाला कृष्ण भक्ति का अद्भुत महाकाव्य, पढ़ें सूरदास के दोहे

Surdas Jayanti: बिना दृष्टि के ही रच डाला कृष्ण भक्ति का अद्भुत महाकाव्य, पढ़ें सूरदास के दोहे

सूरदास जयंती पर पढ़ें सूर के दोहे

सूरदास जयंती पर पढ़ें सूर के दोहे

सूरदास जयंती (Surdas Jayanti): मैया मोहि मैं नही माखन खायौ, भोर भयो गैयन के पाछे ,मधुबन मोहि पठायो...

    सूरदास जयंती (Surdas Jayanti): आज सूरदास जयंती है. सूरदास कृष्ण भगवान के अनन्य भक्त थे. सूरदास जी आंखों से देख नहीं सकते थे लेकिन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूरदास की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण में उन्हें दिव्य ज्योति दी थी जिससे कि सूरदास आंखें न होने के बावजूद भी किसी के मन की बात भी बड़ी आसानी से पढ़ लेते थे. सूरदास ने ब्रजभाषा में कृष्ण भक्ति पर कई महाकाव्य और दोहों की रचना की है. दृष्टि न होने के बावजूद भी उन्होंने जिस खूबसूरती के साथ कृष्ण की लीलाओं की रचना की है वो बेहद सजीव और सुन्दर मालूम पड़ती है. अपनी रचनाओं में सूरदास ने भक्ति रस और श्रृंगार रस का सुंदर समायोजन किया है. सूरदास का जन्म 1478 ईस्वी में रुनकता नाम के गांव में हुआ, अब यह गांव मथुरा-आगरा मार्ग के किनारे है. आइए पढ़ते हैं सूरदास के कुछ दोहे...

    सूरदास के कुछ दोहे...

    मैया मोहि मैं नही माखन खायौ...


    मैया मोहि मैं नही माखन खायौ ।
    भोर भयो गैयन के पाछे ,मधुबन मोहि पठायो ।
    चार पहर बंसीबट भटक्यो , साँझ परे घर आयो ।।
    मैं बालक बहियन को छोटो ,छीको किहि बिधि पायो ।
    ग्वाल बाल सब बैर पड़े है ,बरबस मुख लपटायो ।।
    तू जननी मन की अति भोरी इनके कहें पतिआयो ।
    जिय तेरे कछु भेद उपजि है ,जानि परायो जायो ।।
    यह लै अपनी लकुटी कमरिया ,बहुतहिं नाच नचायों।
    सूरदास तब बिहँसि जसोदा लै उर कंठ लगायो ।।”

    मैया मोहि कबहुँ बढ़ेगी चोटी...


    मैया मोहि कबहुँ बढ़ेगी चोटी, किती बेर मोहि दूध पियत भइ यह अजहू है छोटी ।।
    तू तो कहति बल की बेनी ज्यों ह्वै है लांबी मोटी ।
    काढ़त गुहत न्हावावत जैहै नागिन सी भुई लोटी ।।
    काचो दूध पियावति पचि -पचि देति न माखन रोटी ।
    सूरदास त्रिभुवन मनमोहन हरि हलधर की जोटी ।।

    बुझत स्याम कौन तू गोरी...


    बुझत स्याम कौन तू गोरी। कहां रहति काकी है बेटी देखी नही कहूं ब्रज खोरी ।।
    काहे को हम ब्रजतन आवति खेलति रहहि आपनी पौरी ।
    सुनत रहति स्त्रवननि नंद ढोटा करत फिरत माखन दधि चोरी ।।
    तुम्हरो कहा चोरी हम लैहैं खेलन चलौ संग मिलि
    जोरी ।
    सूरदास प्रभु रसिक सिरोमनि बातनि भूरइ राधिका भोरी ।।

    Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

    Tags: Religion

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