सूर्य देव का जन्म कैसे हुआ? कथा से जानें रहस्य

सूर्य की उत्पत्ति कैसे हुई, कथा से जानें

सूर्य की उत्पत्ति कैसे हुई, कथा से जानें

Surya Dev Birth Katha- सूर्य को प्रतिदिन जल देने से जातक को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं. साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सूर्य देव का जन्म कैसे हुआ. पढ़ें सूर्य देव के जन्म की पौराणिक कथा...

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Surya Dev Birth Katha: हिंदू धर्म में पंचदेवों में से सूर्य देव भी एक माने गए हैं. वहीं ज्योतिष में भी सूर्य का बहुत महत्व माना गया है. ज्योतिष के अनुसार सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है. यह मनुष्य के जीवन में मान-सम्मान, पिता-पुत्र और सफलता का कारक माना गया है. ज्योतिष के अनुसार सूर्य हर माह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं. इस तरह से बारह राशियों में सूर्य एक वर्ष में अपना चक्र पूर्ण करते हैं. सूर्य को आरोग्य का देवता माना गया है. सूर्य के प्रकाश से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है. सूर्य को प्रतिदिन जल देने से जातक को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं. साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सूर्य देव का जन्म कैसे हुआ. पढ़ें सूर्य देव के जन्म की पौराणिक कथा...

सूर्य देव के जन्म की पौराणिक कथा:

पौराणिक कथा के अनुसार, पहले यह सम्पूर्ण जगत प्रकाश रहित था. उस समय कमलयोनि ब्रह्मा जी प्रकट हुए. उनके मुख से प्रथम शब्द ॐ निकला जो सूर्य का तेज रुपी सूक्ष्म रूप था. तत्पश्चात ब्रह्मा जी के चार मुखों से चार वेद प्रकट हुए जो ॐ के तेज में एकाकार हो गए.

यह वैदिक तेज ही आदित्य है जो विश्व का अविनाशी कारण है. ये वेद स्वरूप सूर्य ही सृष्टि की उत्पत्ति,पालन व संहार के कारण हैं. ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर सूर्य ने अपने महातेज को समेट कर स्वल्प तेज को ही धारण किया.
सृष्टि रचना के समय ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि हुए जिनके पुत्र ऋषि कश्यप का विवाह अदिति से हुआ. अदिति ने घोर तप द्वारा भगवान् सूर्य को प्रसन्न किया जिन्होंने उसकी इच्छा पूर्ति के लिए सुषुम्ना नाम की किरण से उसके गर्भ में प्रवेश किया. गर्भावस्था में भी अदिति चान्द्रायण जैसे कठिन व्रतों का पालन करती थी.

ऋषि राज कश्यप ने क्रोधित हो कर अदिति से कहा-'तुम इस तरह उपवास रख कर गर्भस्थ शिशु को क्यों मरना चाहती हो'

यह सुन कर देवी अदिति ने गर्भ के बालक को उदर से बाहर कर दिया जो अपने अत्यंत दिव्य तेज से प्रज्वल्लित हो रहा था. भगवान् सूर्य शिशु रूप में उस गर्भ से प्रगट हुए. अदिति को मारिचम- अन्डम कहा जाने के कारण यह बालक मार्तंड नाम से प्रसिद्ध हुआ. ब्रह्मपुराण में अदिति के गर्भ से जन्मे सूर्य के अंश को विवस्वान कहा गया है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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