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ग्रहण के दौरान पशु-पक्षी करने लगते हैं अजीबोगरीब व्यवहार, जानें क्या कहते हैं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा जी

ग्रहण हमेशा पूर्णिमा या अमावस्या पर पड़ता है

ग्रहण हमेशा पूर्णिमा या अमावस्या पर पड़ता है

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है जो हमेशा पूर्णिमा और अमावस्या तिथि पर ही पड़ती है. ग्रहण का असर न सिर्फ जी ...अधिक पढ़ें

Surya Grahan 2022: हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण लगना अशुभ माना जाता है. फिर चाहे वह सूर्यग्रहण हो या चंद्रग्रहण. इन दोनों ही ग्रहण को अशुभ मानकर ग्रहण काल में कोई भी काम करना वर्जित माना जाता है. ग्रहण न सिर्फ इंसान को प्रभावित करता है बल्कि इसका असर पशु-पक्षियों पर भी देखने को मिलता है. ग्रहण काल में कई पशु-पक्षी ऐसे हैं जिनके व्यवहार में अजीबोगरीब बदलाव देखने को मिलता है. ग्रहण काल खत्म होते ही वह सभी सामान्य स्थिति में आ जाते हैं. यहां पर आपके मन में एक सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर पशु-पक्षी पर ग्रहण का असर होता है तो इसके पीछे की वजह क्या है? घटना के पीछे की वजह हमें बताई है भोपाल के रहने वाले पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा जी ने. आइए जानते हैं क्या कहते हैं पंडित जी.

पंडित जी ने बताया कि ग्रहण हमेशा पूर्णिमा या अमावस्या पर पड़ता है. इस दौरान चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति बहुत ज्यादा प्रभावी होती है जो न सिर्फ जीव-जंतु बल्कि महासागर को भी प्रभावित करती है. चंद्रमा जल की प्रधानता लिए होता है जिसका असर हर उस चीज़ पर पड़ता है जिसमें जल पाया जाता है. यही कारण है कि ग्रहण के दौरान जीव-जंतु अजीबोगरीब व्यवहार करने लगते हैं.

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एक रिपोर्ट के अनुसार ग्रहण काल में मकड़ी की कुछ प्रजातियों में कुछ अजीबोगरीब व्यवहार देखने को मिलता है. ग्रहण काल में मकड़ियां बेचैन होकर अपना जाल तोड़ देती हैं और ग्रहण खत्म होते ही उसे दोबारा बुनने लगती हैं.

वहीं चमगादड़ ग्रहण के दौरान रात होने के भ्रम में यहां-वहां बेचैन होकर उड़ने लगते हैं. इसके अलावा अर्जेंटीना और ब्राजील में पाई जाने वाली बंदर की एक प्रजाति जिसे नाइट मंकी के नाम से जाना जाता है, आमतौर पर बहुत उछल कूद करते हैं लेकिन ग्रहण लगते ही वह डर जाते हैं और उन्हें पेड़ों पर चलने में भी डर लगता है.

दरियाई घोड़ा जो पानी में ही रहता है लेकिन सूर्यग्रहण लगते ही यह पानी से सूखे की तरह भागने लगता है. यदि आधे रास्ते में ग्रहण खत्म हो जाता है तो यह वापस पानी की तरफ जाने लगता है.

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वैज्ञानिकों ने जंगली बर्फीली बत्तख गीज के ऊपर एक रिसर्च की थी. वैज्ञानिकों ने उस बत्तख के शरीर में एक छोटी सी चिप लगा दी थी जिससे पता चला कि ग्रहण के दौरान इन बत्तखों की धड़कन तेज हो जाती है और ग्रहण खत्म होते ही वे सामान्य स्थिति में आ जाती हैं.

Tags: Dharma Aastha, Religion, Solar eclipse, Surya Grahan

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