भारत में हैं कई अजीबो-गरीब धार्मिक मान्यताएं, कही प्रसाद में चढ़ती है लौकी, कहीं होता है ये

भारत के कुछ भागों में अजीबो-गरीब धार्मिक मान्यताएं हैं. (सांकेतिक तस्‍वीर)
भारत के कुछ भागों में अजीबो-गरीब धार्मिक मान्यताएं हैं. (सांकेतिक तस्‍वीर)

भारत (India) के कई हिस्सों में कुछ समुदायों के धार्मिक रीति-रिवाज (Religious Observance) अपने आप में अजीबो-गरीब हैं, जिन पर विश्वास कर पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 28, 2020, 2:15 PM IST
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भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में जाति और धर्म के नाम पर कई परंपराओं और रीति-रिवाजों का चलन है. साथ ही कई ऐसी मान्यताएं और प्रथा भी हैं जो सदियों से चली आ रही हैं. देश के कई हिस्सों में कुछ समुदायों के धार्मिक रीति-रिवाज (religious observance) अपने आप में असामान्य हैं जिन पर विश्वास कर पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. इन धार्मिक परंपराओं में कई तरह के अजीबों-गरीब रीति-रिवाज और मान्यताओं का भी समावेश है. ऐसी ही अजीबो-गरीब धार्मिक रीति-रिवाजों (Interesting Rituals) पर बात करेंगे, जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

प्रसाद स्वरूप चढ़ती है मां को लौकी
वैसे तो अक्‍सर देखा होगा कि मंदिर में दर्शन के लिए गए लोग प्रसाद में मिठाई, लड्डू आदि चढ़ाते हैं. मगर देश के कुछ मंदिर ऐसे भी हैं, जहां ऐसा नहीं होता. हम बात कर रहे हैं रतनपुर में शाटन देवी मंदिर की, जहां एक अजीब प्रकार की परंपरा का चलन है. बता दें कि अमूमन मंदिरों में प्रसाद स्वरूप लड्डू, फल, फूल नारियल चढ़ाने की प्रथा होती है, लेकिन शाटन देवी मंदिर में तेंदू की लकड़ियों और लौकी का प्रसाद चढ़ाया जाता है. मान्यता है कि बच्चों की मन्नतों के लिए यह मंदिर प्रसिद्ध है. भक्त यहां बच्चों के स्वास्थ्य की कामना करते हैं.

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पिंड नहीं शिवलिंग करते हैं दान


उत्तर प्रदेश के मशहूर शहर वाराणसी में शिव का यह मठ सबसे पुराने मठों में गिना जाता है. यहां आत्मा की शांति के लिए पिंड नहीं बल्कि शिवलिंग का दान करने की अनोखी प्रथा का चलन हैं. इस कारण मठ में श्रृद्धालुओं द्वारा दान किए गए शिवलिंग की संख्या लाखों में हैं. इतना ही नहीं इस मठ में एक बार में लाखों की संख्या में शिवलिंग विराजे जाते हैं.

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सांपों का त्यौहार
हिंदू कलेंडर के अनुसार सावन महीने के पांचवें दिन नाग पंचमी मनाने का रिवाज है. इस दिन नाग को पूजने की प्रथा का चलन सदियों से चला आ रहा है. मान्यता है कि नाग के जहर के दांत तोड़ दिए जाते हैं और उनको दूध पिलाया जाता है. इस दिन सांप की पूजा हल्दी-कुमकुम और फूलों की पत्तियों से की जाने की प्रथा है. (Dclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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