कुछ ऐसी थी भगवान राम की वंशावली, जानें ब्रह्माजी से लेकर श्रीराम तक के जन्म की कहानी

भगवान श्रीराम की वंश परंपरा.

भगवान श्रीराम की वंश परंपरा.

भगवान श्रीराम (Lord Shri Rama) हिंदूओं के आराध्य देवता हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या (Ayodhya) में त्रेया युग में हुआ था. भगवान राम विष्णु के 7वें अवतार माने जाते हैं. कहते हैं भगवान राम का जन्म सूर्य वंश में हुआ था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 5, 2020, 8:26 AM IST
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आज यानी 5 अगस्त 2020 को भगवान श्रीराम (Lord Shri Rama) की जन्मभूमि अयोध्या (Ayodhya) में भव्य राम मंदिर (Rama Mandir) निर्माण के लिए भूमि पूजन किया जाएगा. इसके लिए पहले से ही अयोध्या में जोरदार तैयारियां चल रही थीं. भगवान श्रीराम हिंदूओं के आराध्य देवता हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में त्रेया युग में हुआ था. भगवान राम विष्णु के 7वें अवतार माने जाते हैं. कहते हैं भगवान राम का जन्म सूर्य वंश में हुआ था. राम मंदिर भूमि पूजन के मौके पर आइए जानते हैं भगवान श्रीराम की वंश परंपरा के बारे में यानी ब्रह्रााजी से लेकर भगवान राम तक की जानकारी.

विवस्वान से पुत्र वैवस्वत मनु हुए
ब्रह्माजी से मरीचि हुए और मरीचि के पुत्र कश्यप हुए. इसके बाद कश्यप के पुत्र विवस्वान हुए. जब विवस्वान हुए तभी से सूर्यवंश का आरंभ माना जाता है. विवस्वान से पुत्र वैवस्वत मनु हुए. वैवस्वत मनु के 10 पुत्र हुए- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम (नाभाग), अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध. भगवान राम का जन्म वैवस्वत मनु के दूसरे पुत्र इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था. आपको बता दें कि जैन धर्म के तीर्थंकर निमि भी इसी कुल में पैदा हुए थे.

अयोध्या नगरी की स्थापना इक्ष्वाकु के समय ही हुई
इक्ष्वाकु से सूर्यवंश में वृद्धि होती चली गई. इक्ष्वाकु वंश में कई पुत्रों का जन्म हुआ जिनमें विकुक्षि, निमि और दण्डक पुत्र शामिल हैं. समय के साथ धीरे-धीरे यह वंश परंपरा आगे की तरफ बढ़ती चली गई जिसमें हरिश्चन्द्र रोहित, वृष, बाहु और सगर भी पैदा हुए. अयोध्या नगरी की स्थापना इक्ष्वाकु के समय ही हुई. इक्ष्वाकु कौशल देश के राजा थे जिसकी राजधानी साकेत थी, जिसे अयोध्या कहा जाता है. रामायण में गुरु वशिष्ठ ने राम के कुल का विस्तार पूर्वक वर्णन किया है.



युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए
इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि, कुक्षि के पुत्र विकुक्षि हुए. इसके बाद में विकुक्षि की संतान बाण हुई और बाण के पुत्र अनरण्य हुए. समय के साथ यह क्रम चलता रहा जिसमें अनरण्य से पृथु और पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ. त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए. धुंधुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था. युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए और मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ. सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि और प्रसेनजित. ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए.

दिलीप से प्रतापी भगीरथ पुत्र हुए
भरत के पुत्र असित के होने के बाद फिर असित के पुत्र सगर का जन्म हुआ. सगर अयोध्या के सूर्यवंशी पराक्रमी राजा थे. राजा सगर के पुत्र असमंज हुए. इसी तरह से असमंज के पुत्र अंशुमान हुए फिर अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए. दिलीप से प्रतापी भगीरथ पुत्र हुए जो मां गंगा को कठोर तप के बल पर पृथ्वी पर लाने में सफल हुए थे. भगीरथ के पुत्र ककुत्स्थ हुए और ककुत्स्थ के पुत्र रघु का जन्म हुआ.

दशरथ ने चार पुत्रों को जन्म दिया
रघु के जन्म होने पर ही इस वंश का नाम रघुवंश पड़ा क्योंकि रघु बहुत ही पराक्रमी और ओजस्वी नरेश थे. रघु से उनके पुत्र प्रवृद्ध हुए. प्रवृद्ध से होते होते कई वंश चलते गए जिसमें नाभाग हुए फिर नाभाग के पुत्र अज हुए. अज से पुत्र दशरथ हुए और दशरथ अयोध्या के राजा बने. दशरथ ने चार पुत्रों को जन्म दिया. भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शुत्रुघ्न. इस प्रकार भगवान राम का जन्म ब्रह्राजी की 67 पीढ़ियों में हुआ. (वाल्मीकि रामायण- ।।1-59 से 72।।) (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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