तिरुपति बालाजी मंदिरः आज से आम लोगों के लिए खुले मंदिर के कपाट, दर्शन से पहले जान लें ये खास बात

तिरुपति वेंकेटेश्वर मंदिर तिरुपति में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू एवं जैन मंदिर है.
तिरुपति वेंकेटेश्वर मंदिर तिरुपति में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू एवं जैन मंदिर है.

केंद्र सरकार की गाइडलाइन (Guideline) के मुताबिक 10 से कम और 65 साल से अधिक आयु वाले लोगों को तिरुपति बालाजी (Tirupati Balaji) मंदिर में दर्शन (Darshan) की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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देशभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचने के लिए जारी किए गए लॉकडाउन (Lockdown) के बाद गत 8 जून से कई इलाकों में धार्मिक स्थलों को फिर से खोल दिया गया है. हालांकि महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे कई राज्यों में मंदिर के कपाट अभी भी नहीं खुले हैं. वहीं इसी कड़ी में तिरुपति बालाजी (Tirupati Balaji) में भी आम लोगों के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोलें जा चुके हैं. सरकारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, 11 जून से तिरुपति बालाजी मंदिर के दरवाजे आम श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे. आपको बता दें कि तिरुपति बालाजी मंदिर गत 20 मार्च से बंद है. 11 जून से सुबह 6.30 से शाम 7.30 तक मंदिर में आम लोग दर्शन (Darshan) कर पाएंगे.

दिशानिर्देशों के मुताबिक, एक दिन में केवल 6000 लोगों के दर्शन हो सकेंगे. हर घंटे में केवल 500 लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति मिलेगी. इस संबंध में  तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् ट्रस्ट ने ये भी साफ किया है कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक 10 से कम और 65 साल से अधिक आयु वाले लोगों को दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी. मंदिर में कोरोना के टेस्ट के लिए स्थायी कैंप होगा जिसमें रोज 200 कर्मचारियों और श्रद्धालुओं का रैंडम टेस्ट होगा. कुल 6000 लोगों में 3000 लोग वीआईपी टिकट पर (300 रुपए प्रति व्यक्ति) दर्शन कर सकेंगे. इसके लिए भी ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग 8 जून को सुबह से शुरू हो चुकी है. आइए जानते हैं तिरुपति बालाजी के बारे में ये खास बातें.

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तिरुमला की पहाड़ियों पर बना मंदिर
तिरुपति वेंकेटेश्वर मंदिर तिरुपति में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू एवं जैन मंदिर है. तिरुपति भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है. यह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है. प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में दर्शनार्थी यहां आते हैं. तिरुमला की पहाड़ियों पर बना यह मंदिर इस इलाके का सबसे बड़ा आकर्षण है. कई शताब्दी पूर्व बना यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला और शिल्पकला का अदभूत उदाहरण है.

बालाजी भगवान विष्णु के अवतार
प्रभु वेंकटेश्वर या बालाजी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि प्रभु विष्णु ने कुछ समय के लिए स्वामी पुष्करणी नामक तालाब के किनारे निवास किया था. यह तालाब तिरुमाला के पास स्थित है. तिरुमाला- तिरुपति के चारों ओर स्थित पहाड़ियां, शेषनाग के सात फनों के आधार पर बनीं 'सप्तगिरि' कहलाती है. श्री वेंकटेश्वरैया का यह मंदिर सप्तगिरि की सातवीं पहाड़ी पर स्थित है, जो वेंकटाद्री नाम से प्रसिद्ध है.

120 वर्ष की आयु तक जीवित रहे
वहीं एक दूसरी अनुश्रुति के अनुसार, 11वीं शताब्दी में संत रामानुज ने तिरुपति की इस सातवीं पहाड़ी पर चढ़ाई की थी. प्रभु श्रीनिवास (वेंकटेश्वर का दूसरा नाम) उनके समक्ष प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया. ऐसा माना जाता है कि प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात वह 120 वर्ष की आयु तक जीवित रहे और जगह-जगह घूमकर वेंकटेश्वर भगवान की ख्याति फैलाई. वैकुंठ एकादशी के अवसर पर लोग यहां पर प्रभु के दर्शन के लिए आते हैं. यहां पर आने के पश्चात उनके सभी पाप धुल जाते हैं. मान्यता है कि यहां आने के पश्चात व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल जाती है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
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