अपना शहर चुनें

States

Kajari Teej 2020: आज है कजरी तीज, जानें व्रत का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

कजरी तीज पर सुहागिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा-अर्चना करती हैं. अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख समृद्धि की मनोकामना के लिए भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं.
कजरी तीज पर सुहागिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा-अर्चना करती हैं. अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख समृद्धि की मनोकामना के लिए भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं.

कजरी तीज (Kajari Teej) व्रत को सुहागिन महिलाएं (Married women) निर्जला व्रत के रूप में रखती हैं. कजरी तीज पर सुहागिन महिलाएं भगवान शिव (Lord Shiva), माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा-अर्चना करती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 6, 2020, 6:58 AM IST
  • Share this:
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर कजरी तीज (Kajari Teej) का व्रत रखा जाता है. इस बार यह त्योहार गुरुवार 6 अगस्त यानी आज मनाया जा रहा है. अलग-अलग जगहों पर इस व्रत (Vrat) को अलग-अलग नाम से जाना जाता है जैसे कजरी तीज, कजली तीज, बूढ़ी तीज और सातूड़ी तीज. इस व्रत को सुहागिन महिलाएं (Married women) निर्जला व्रत के रूप में रखती हैं. कजरी तीज पर सुहागिन महिलाएं भगवान शिव (Lord Shiva), माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा-अर्चना करती हैं. अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख समृद्धि की मनोकामना के लिए भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं.

कजरी तीज शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि आरंभ- 5 अगस्त 2020, बुधवार, सुबह 10 बजकर 50 मिनट से
तृतीया तिथि समाप्त- 7 अगस्त 2020, शुक्रवार रात 12 बजकर 14 मिनट तक
कजरी तीज पूजा विधि
कजरी व्रत में सुहागिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर पूजा के लिए तैयार होती हैं. इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं. महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और माता पार्वती संग भगवान शिव की पूजा उपासना करती हैं. पूजा के भोग के लिए जौ, गेहूं, चने और चावल के सत्तू में घी और मेवा मिलाकर तैयार किया जाता है. भगवान की आरती और मंत्रोच्चारण कर शाम को कजरी तीज की कथा पढ़ी जाती है. इसके बाद शाम के समय चंद्रमा के निकलने का इंतजार किया जाता है. चांद के दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य दिया जाता है.



नीमड़ी माता की पूजा विधि
सबसे पहले पूजा की शुरुआत नीमड़ी माता को जल व रोली के छींटे देकर करें. फिर अक्षत चढ़ाएं. अनामिका उंगली से नीमड़ी माता के पीछे दीवार पर मेहंदी, रोली की 13 बिंदिया लगाएं. साथ ही काजल की 13 बिंदी भी लगाएं. काजल की बिंदियां तर्जनी उंगली से लगाएं. नीमड़ी माता को मोली चढ़ाएं और उसके बाद मेहंदी, काजल और वस्त्र भी अर्पित करें. फिर उसके बाद जो भी चीजें आपने माता को अर्पित की हैं, उसका प्रतिबिंब तालाब के दूध और जल में देखें. तत्पश्चात गहनों और साड़ी के पल्ले का प्रतिबिंब भी देखें. पूजा संपन्न होने के बाद अपने से बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज