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Pradosh Vrat 2020: आज है सावन का पहला शनि प्रदोष व्रत, ऐसे पूजा कर भगवान शिव को करें खुश

नेपाल में बागमती नदी के किनारे काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर स्थित है. यह मंदिर यूनेस्को की विश्व हेरिटेज श्रेणी में आता है.

नेपाल में बागमती नदी के किनारे काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर स्थित है. यह मंदिर यूनेस्को की विश्व हेरिटेज श्रेणी में आता है.

सावन (Sawan) में आने वाले प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) का महत्व और भी ज्यादा है. हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार प्रदोष व्रत चंद्र मास के 13वें दिन (त्रयोदशी) पर रखा जाता है.

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    प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) में भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा की जाती है. यह व्रत हिंदू धर्म के सबसे शुभ व महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है. सावन (Sawan) में आने वाले प्रदोष व्रत का महत्व और भी ज्यादा है. हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार प्रदोष व्रत चंद्र मास के 13वें दिन (त्रयोदशी) पर रखा जाता है. माना जाता है कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. सावन महीने का पहला प्रदोष व्रत इस बार 18 जुलाई यानी आज पड़ रहा है.

    प्रदोष व्रत की महिमा
    शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से पुण्य की प्राप्ति होती है. प्रदोष व्रत को लेकर पौराणिक मान्यता के अनुसार एक दिन जब चारों ओर अधर्म की स्थिति होगी, अन्याय और अनाचार का एकाधिकार होगा, मनुष्य में स्वार्थ भाव अधिक होगा, व्यक्ति सत्कर्म करने के स्थान पर नीच कार्यों को अधिक करेगा, उस समय में जो व्यक्ति त्रयोदशी का व्रत रख, शिव की आराधना करेगा, उस पर शिव की कृपा होगी. इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जन्म-जन्मान्तर के फेरों से निकल कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ेगा. उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है.

    शनि प्रदोष व्रत की मान्यता
    ऐसी मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से शनि सहित दूसरे अशुभ ग्रहों के प्रभाव से जीवन में चल रही परेशानी दूर हो जाती है. इस संदर्भ में एक कथा है कि एक राजा का पुत्र बचपन में ही परिवार से अलग हो गया था. उसका राजपाट सब छिन गया था. वह गरीबी में पलकर बड़ा हुआ और एक दिन इस व्रत के प्रभाव से उसे गंधर्वों का साथ मिला और वह अपना खोया राजपाट पाने में सफल हुआ. शनि प्रदोष व्रत साल में कभी भी आए तो इसका फल अन्य प्रदोष व्रत से अधिक होता है लेकिन सावन में अगर प्रदोष व्रत शनिवार को मिल जाए तो इसे छोड़ना नहीं चाहिए. इस दुर्लभ संयोग का लाभ उठाकर व्रत करना चाहिए. अगर व्रत करना संभव न हो तब इस दिन पीपल के पेड़ को जल जरूर देना चाहिए और भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए.

    शनि प्रदोष व्रत का लाभ
    शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और पीपल को जल देने का फल अपार बताया गया है. ब्रह्मपुराण में कहा गया है कि शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का स्पर्श करके जो व्यक्ति 108 बार ओम नम: शिवाय मंत्र का जप करता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं. शनि दोष की पीड़ा और जीवन में चल रही कठिनाइयों से भी व्यक्ति को छुटकारा मिलता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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