रविवार को सूर्य देव की पूजा में जरूर इस्तेमाल करें ये चीजें, जानें सूर्य साधना का महत्व

जीवन में सूर्य के महत्व को देखते हुए लोग सुबह उठकर सूर्य को नमन करते हैं.
जीवन में सूर्य के महत्व को देखते हुए लोग सुबह उठकर सूर्य को नमन करते हैं.

भगवान भास्कर यानी सूर्यदेव (Lord Surya) की साधना-आराधना का अक्षय फल मिलता है. सच्चे मन से की गई साधना से प्रसन्न होकर सूर्य देव अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्रदान करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 18, 2020, 9:07 AM IST
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रविवार (Sunday) को दिन सूर्य देव (Lord Surya) की उपासना का दिन माना गया है. मान्यता है कि रविवार को सूर्य देव की पूजा और व्रत (Vrat) रखने से रोगों से मुक्ति मिलती हैं और बल बुद्धि का तीव्र विकास होता है. साथ ही यशगान भी भी प्राप्ति होती है. सभी देवों में सूर्य और चंद्रमा ही ऐसे देव हैं जिन्हें आंखों से देख सकते हैं. सूर्य को ऊर्जा और जीवन का कारक माना गया है. यहां तक कि सूर्य की रोशनी कई बीमारियों से बचाती है. सूर्य की महिमा को पुराणों में भी बताया गया है. जीवन में सूर्य के महत्व को देखते हुए लोग सुबह उठकर सूर्य को नमन करते हैं. सभी नवग्रहों में सूर्य को ग्रहों के राजा की उपाधि प्राप्त है. सूर्य के कारण ही ऋतुओं का परिवर्तन होता है. सात घोड़ों पर सवार होकर सूर्य बिना थके और रुके निरंतर दौड़ते रहते थे.

सूर्य की साधना का महत्व 
भगवान भास्कर यानी सूर्यदेव की साधना-आराधना का अक्षय फल मिलता है. सच्चे मन से की गई साधना से प्रसन्न होकर सूर्य देव अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को नवग्रहों में प्रथम ग्रह और पिता के भाव कर्म का स्वामी माना गया है. जीवन से जुड़े तमाम दुखों और रोग आदि को दूर करने के साथ-साथ जिन्हें संतान नहीं होती उन्हें सूर्य साधना से लाभ होता है. पिता-पुत्र के संबंधों में विशेष लाभ के लिए सूर्य साधना पुत्र को करनी चाहिए.

सात घोड़ों के रथ पर सवार हैं भगवान सूर्य
हमारी सृष्टि के प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य के रथ में सात घोड़े होते हैं, जिन्हे शक्ति और स्फूर्ति का प्रतीक माना जाता है. भगवान सूर्य का रथ यह प्रेरणा देता है कि हमें अच्छे कार्य करते हुए सदैव आगे बढ़ते रहना चाहिए, तभी जीवन में सफलता मिलती है.



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सूर्य देव की पूजा सामग्री
लाल चंदन, गुलाल, कंडेल का पुष्प, लाल वस्त्र और गुड़ से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है. पूजा से पूर्व इन सभी वस्तुओं का जरूर एकत्र कर लें.

पूजन विधि
स्नान के बाद लाल वस्त्र धारण करें. उसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें. जल में थोड़ा गंगाजल और लाल चंदन मिला लेना चाहिए इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं. इसके बाद सूर्य की वस्तुओं का अर्पण करें. जल चढ़ाते समय इस मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम: का जाप करना चाहिए. शाम को सूर्यास्त से पूर्व गुड़ के हलवे से भोग लगाना चाहिए. सूर्य देव को जल चढ़ाते समय जल की धारा से ही सूर्य देव को देखना चाहिए. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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