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Utpanna Ekadashi 2020 Date: उत्पन्ना एकादशी कब है? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

उत्पन्ना एकादशी कब है जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
उत्पन्ना एकादशी कब है जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Utpanna Ekadashi 2020 Date: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत लक्ष्मीपति भगवान विष्णु (God Vishnu) को समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 4, 2020, 1:53 PM IST
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Utpanna Ekadashi 2020 Date: उत्पन्ना एकादशी 11 दिसंबर शुक्रवार को मनाई जाएगी. हिंदू धर्म के पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी हर साल अगहन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत लक्ष्मीपति भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है. एकादशी की तिथि माह में दो बार पड़ती है, पहली कृष्ण पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में. कुछ भक्तजन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इस दिन व्रत भी करते हैं. भगवान विष्णु के भक्त उत्पन्ना एकादशी व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं. आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र...

उत्पन्ना एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त:
उत्पन्ना एकादशी तिथि प्रारम्भ- 10 दिसम्बर की दोपहर 12 बजकर 51 मिनट पर हो जाएगा.

एकादशी तिथि का समापन- 11 दिसम्बर की सुबह 10 बजकर 04 मिनट पर होगा.
एकादशी व्रत पारण का समय- 11 दिसम्बर की दोपहर 01 बजकर 17 मिनट से 03 बजकर 21 मिनट पर भक्त व्रत का पारण कर सकेंगे.



पारण के दिन श्री विष्णु का वार समाप्त होने का समय दोपहर 03 बजकर 18 मिनट है.

उत्पन्ना एकादशी की पूजा-विधि:
-उत्पन्ना एकादशी व्रत की तैयारी एक दिन पहले यानी कि दशमी के दिन से ही करनी शुरू कर दें. इसके लिए दशमी को रात में खाना खाने के बाद अच्छे से दातून से दांतों को साफ़ कर लें ताकि मुंह जूठा न रहे. इसके बाद आहार ग्रहण न करें और खुद पर संयम रखें. साथी के साथ शारीरिक संबंध से परहेज करें. उत्पन्ना एकादशी के दिन सुबह उठकर नित्यकर्म करने के बाद. नए कपड़े पहनकर पूजाघर में जाएं और भगवान के सामने व्रत करने का संकल्प मन ही मन दोहरायें. इसके बाद भगवान विष्णु की आराधना करें और पंडित जी से व्रत की कथा सुनें. ऐसा करने से आपके समस्त रोग, दोष और पापों का नाश होगा. इस दिन मन की सात्विकता का ख़ास ख्याल रखें.

मन में न लायें दूषित विचार: किसी के प्रति भी बुरा या कोई यौन संबंधी विचार मन में न लायें. शाम के समय भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर दीपदान करे. अब अगले दिन यानी कि द्वादशी को इस व्रत को खोल दें. इसके बाद किसी पंडित जी या ब्राह्मण को अपनी स्वेच्छानुसार दान-दक्षिणा दें. इस बात का ख़ास ख्याल रखें कि इस दिन केवल सुबह और शाम के समय ही आहार ग्रहण करना है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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