लाइव टीवी

Utpanna Ekadashi: उत्पन्ना एकादशी आज, यहां पढ़ें व्रत कथा

News18Hindi
Updated: November 22, 2019, 1:23 PM IST
Utpanna Ekadashi: उत्पन्ना एकादशी आज, यहां पढ़ें व्रत कथा
उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

Utpanna Ekadashi Vrat Katha: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक उत्पन्ना एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 22, 2019, 1:23 PM IST
  • Share this:
Utpanna Ekadashi: 22 नवंबर यानी आज एकादशी का योग है. मार्गशीष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के लिए लोग व्रत रखते हैं. साथ ही विशेष पूजा की जाती है. विष्णुजी के साथ ही देवी लक्ष्मी की पूजा करने से धन संबंधी कामों में आ रही परेशानियां भी खत्म हो सकती हैं. कहते हैं कि इस दिन मां एकादशी ने उत्‍पन्न होकर अतिबलशाली और अत्‍याचारी राक्षस मुर का वध किया था. मान्‍यता के अनुसार इस दिन स्‍वयं भगवान विष्‍णु ने माता एकादशी को आशीर्वाद देते हुए इस व्रत को पूज्‍यनीय बताया था. माना जाता है कि इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से सभी पापों का नाश हो जाता है.  आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी की व्रत कथा-

उत्पन्ना एकादशी की व्रत कथा:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में मुर नाम का एक राक्षस था जो हमेशा स्वर्ग में आतंक मचाये रहता था. देवी-देवता मुर से परेशान होकर भगवान शिव की शरण में पहुंचे. शिव जी ने उन्हें भगवान विष्णु के पास जाने को कहा. देवताओं की अनुनय-विनय पर विष्णु भगवान ने मुर से युद्ध करना स्वीकार किया. कई सालों तक भगवान विष्णु और मुर के बीच लड़ाई चलती रही.

इसे भी पढ़ेंः ये है गायत्री मंत्र के जाप का सटीक तरीका, जान लें मंत्र का अर्थ

इसी बीच विष्णु भगवान को नींद आ गई. लड़ाई बीच में छोड़कर ही विष्णु भगवान एक गुफा में जाकर विश्राम करने लगे. मुर ने उन्हें सोता देखकर उनपर तलवार से वार करना चाहा लेकिन तभी भगवान विष्णु के शरीर से एक कन्या प्रकट हुई और उसने मुर का सिर उसके धड़ से अलग कर दिया.

इसे भी पढ़ेंः Margashirsha Maas: भगवान कृष्ण का है अगहन माह, ऐसे करें पूजा पाठ

जब भगवान विष्णु की नींद खुली तो वो बहुत प्रसन्न हुए और कन्या को मनचाहा वर मांगने को कहा. इस पर देवीरूपी उस कन्या ने कहा कि हे प्रभु, यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे यदि वरदान दीजिए कि जो भी भक्तजन एकादशी के दिन पूरे दिन पूजा-पाठ कर उपवास रखे उसे मनोवांछित फलों की प्राप्ति हो और उसके सारे पाप, रोग, दोष मिट जाएं. कन्या के ऐसा वर मांगने पर भगवान विष्णु तथास्तु कहा और कहा कि जो भी व्यक्ति ये व्रत रखेगा उस पर मेरी अनन्य कृपा होगी. सभी प्रकार के व्रतों में मुझे एकादशी का व्रत ही सर्वाधिक प्रिय होगा. ऐसा कहकर भगवान विष्णु अंतर्ध्यान हो गए. दरअसल जिस दिन भगवान विष्णु के शरीर से कन्या प्रकट हुई थी उस दिन मार्गशीर्ष मास की एकादशी थी. तभी से एकादशी व्रत रखने की परम्परा प्रचलन में आई.
Loading...

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 22, 2019, 5:35 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...