होम /न्यूज /धर्म /Aastha: अपने भक्तों को सपनों में दर्शन देती है यह देवी, मंदिर में पूरी होती है हर इच्छा , जानिए क्या है मान्यता

Aastha: अपने भक्तों को सपनों में दर्शन देती है यह देवी, मंदिर में पूरी होती है हर इच्छा , जानिए क्या है मान्यता

X
मां

मां नंदा देवी चंद वंश की कुलदेवी हैं.

अल्मोड़ा की नंदा देवी चंद वंश राजाओं की कुलदेवी है. मान्यता है कि देवी आज भी स्वप्न में आकर लोगों को दर्शन देती है और उ ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट : रोहित भट्ट

अल्मोड़ा. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन पूरे देश में उत्साह देखने को मिला. अगर हम बात उत्तराखंड के अल्मोड़ा की करे, तो राज्य की सांस्कृतिक नगरी में भी ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं, जो अपनी ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं से जाने जाते हैं. उन्हीं में से एक मंदिर में हम आपको आज लेकर आए हैं. अल्मोड़ा के प्राचीन नंदा देवी मंदिर में. मां नंदा देवी को शैलपुत्री का रूप माना जाता है.

मां नंदा को पूरे उत्तराखंड में पूजा जाता है. अल्मोड़ा में करीब 350 सालों से मां नंदा देवी को पूजा जाता है. अल्मोड़ा की नंदा देवी चंद वंश राजाओं की कुलदेवी है. मान्यता है कि देवी आज भी स्वप्न में आकर लोगों को दर्शन देती है और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं. इस मंदिर में सुबह और शाम आरती होती है. साथ ही लोग यहां शाम के वक्त भजन कीर्तन करते है. इस मंदिर की दीवारों पर आपको शहर के कई चित्र देखने को मिलते है.

चंद वंश राजाओं की कुलदेवी है मां नंदा
बता दे कि अल्मोड़ा में नंदा देवी का प्राचीन मंदिर स्थापित है. 1670 में कुमाऊं के चंद वंशीय शासक राजा बाज बहादुर चंद बधाणगढ़ के किले से नंदा देवी की स्वर्ण प्रतिमा को अल्मोड़ा लाए थे. इस प्रतिमा को उन्होंने मल्ला महल (पुराने कलक्ट्रेट) परिसर में प्रतिष्ठित किया था और अपनी कुलदेवी के रूप में पूजन शुरू किया.

स्वप्न में देती है दर्शन
पुजारी तारा दत्त जोशी ने बताया कि मां नंदा देवी को चंद वंश राजाओं की कुलदेवी के रूप में आज भी लोग इन्हें पूजते है और लोग काफी संख्या में इस मंदिर में पहुंचते है. श्रद्धालु बताते है कि मां उन्हें सपने में दर्शन देती हैं और लोग मंदिर में आकर माता के दर्शन करते हैं. उन्होंने बताया कि पिछले दिनों ही कानपुर से एक श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचे थे. उन्होंने बताया था कि उन्हें माता के दर्शन सपने में हुए, उसके बाद वह इस मंदिर तक आए.

12 वर्षों पर होती है राजजात यात्रा
श्रद्धालु रेखाआर्य ने बताया कि चैत्र नवरात्रि के उपलक्ष में वह मंदिर में पहुंची हुई हैं और वैसे भी मां नंदा पूरे उत्तराखंड की देवी के रूप में पूजी जाती हैं. हर 12 साल के बाद माता की नंदा राजजात यात्रा निकाली जाती है, जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहते हैं. श्रद्धालु निखिल पंत ने बताया कि उनका इस मंदिर से खासा लगाव है. माता साक्षात यहां विराजमान हैं और मां से जो कुछ भी मांगा जाता है, मां उनकी और सभी श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करती हैं.

(NOTE: इस खबर में दी गई सभी जानकारियां और तथ्य मान्यताओं के आधार पर हैं. NEWS18 LOCAL किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है.)

Tags: Dharma Aastha

टॉप स्टोरीज
अधिक पढ़ें