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Vallabhacharya Jayanti 2021: श्री वल्लभ आचार्य जयंती आज, श्री कृष्ण से क्या है जुड़ाव, जानें महिमा

वल्लभ आचार्य भगवान कृष्ण के श्री नाथ स्वरुप के अनन्य भक्त थे

Vallabhacharya Jayanti 2021: श्री वल्लभ आचार्य भगवान श्रीनाथ (Shri Nath) का ही स्वरुप हैं. श्री वल्लभ आचार्य का जन्म एक ब्राह्मण लक्ष्मण भट्ट के घर हुआ था. वल्लभाचार्य जी अष्टमास में पैदा हुए थे.

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    Vallabhacharya Jayanti 2021: आज 7 मई 2021 को श्री वल्लभ आचार्य जयंती मनाई जा रही है. आज वरूथिनी एकादशी भी है. आज श्री वल्लभ आचार्य का 542वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री वल्लभ आचार्य अग्नि देवता का ही दूसरा जन्म हैं. वहीं कुछ अन्य मान्यताओं के अनुसार, श्री वल्लभ आचार्य अपने जीवन में भगवान कृष्ण के भी दर्शन कर चुके थे. पुष्य संप्रदाय की स्थापना श्री वल्लभ आचार्य ने ही की थी. हिंदू धर्म में वल्लभ आचार्य जयंती की बहुत महिमा है. आज के दिन भक्तों ने श्री नाथ जी की पूजा की. श्री नाथ जी कृष्ण भगवान के बाल रूप (जब वो मात्र 7 साल के ) थे, को कहा जाता है.

    श्रीनाथजी को मुख्य रूप से भक्ति योग के अनुयायियों और गुजरात और राजस्थान में वैष्णव और भाटिया एवं अन्य लोगों द्वारा पूजा जाता है. श्रीनाथजी का प्रमुख मंदिर राजस्थान के उदयपुर शहर से 49 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित नाथद्वारा के मंदिर शहर में है. वल्लभ आचार्य जयंती मुख्य रूप से तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और चेन्नई में मनाई जाती है. लेकिन इस बार कोरोना वायरस को दूसरी लहर के चलते लोग अपने घरों में ही श्री वल्लभ आचार्य जयंती मना रहे हैं.

    वल्लभ आचार्य जयंती का मुहूर्त – 7 मई 2021 शुक्रवार दोपहर 3 बजकर 32 मिनट तक मुहूर्त रहेगा.






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    श्री वल्लभ आचार्य का परिचय:


    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री वल्लभ आचार्य भगवान श्रीनाथ का ही स्वरुप हैं. श्री वल्लभ आचार्य का जन्म एक ब्राह्मण लक्ष्मण भट्ट के घर हुआ था. वल्लभाचार्य जी अष्टमास में पैदा हुए थे. उस समय श्री वल्लभ आचार्य में कोई चेतना नहीं थी. ऐसे में दुखी मन से उनके माता पिता उन्हें मृत समझकर छोड़ दिया था. ऐसे में श्री नाथ जी में श्री वल्लभ आचार्य की माता इल्लामागारू को सपने में दर्शन दिया और कहा कि जिस शिशु को तुम छोड़ आए हो वो जीवित है. तुम्हारे गर्भ से स्वयं श्रीनाथ ने जन्म लिया है. भगवान की अद्भुत वाणी सुनकर जब उनके माता- पिता वहां गए तो देखा कि शिशु के चारों तरह आग की लपटें हैं और वो बीच में बड़ी शांति से अंगूठा चूस रहे थे. श्री वल्लभ आचार्य भगवान कृष्ण के श्री नाथ स्वरुप के अनन्य भक्त थे इसलिए उनकी जयंती के दिन भगवान कृष्ण की भी पूजा-अर्चना की जाती है. वल्लभाचार्य जी ने कई महान ग्रथ और स्त्रोत भी लिखे हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
    Published by:Bhagya Shri Singh
    First published: