Vaman Jayanti 2020: वामन जयंती कब है और क्यों मनाई जाती है?

Vaman Jayanti 2020: वामन जयंती कब है और क्यों मनाई जाती है?
वामन जयंती कब

वामन जयंती (Vaman Jayanti 2020): हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वीलोक को असुरराज बलि के अन्याय और अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए वामन अवतार धारण किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 27, 2020, 2:20 PM IST
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वामन जयंती (Vaman Jayanti 2020): वामन जयंती 29 अगस्त को मनाई जाएगी. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को वामन जयंती के नाम से जाना जाता है. इसे परिवर्तिनी एकादशी है, पार्श्व एकादशी, वामन एकादशी, जलझूलनी एकादशी, पद्मा एकादशी, डोल ग्यारस और जयंती एकादशी भी कहा जाता है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वीलोक को असुरराज बलि के अन्याय और अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए वामन अवतार धारण किया था. इस दिन भक्त उपवास रहकर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा अर्चना करते हैं क्योंकि वामन भगवान विष्णु के ही अवतार थे. आइए जानते हैं वामन जयंती की तिथि और वामन व्रत की कथा...
वामन जयंती महत्व (Vamana Jayanti Significance)
सनातन धर्म के अनुसार, श्रवण नक्षत्र होने पर वामन जयंती का काफी धार्मिक महत्त्व हो जाता है. वामन जयंती के दिन भक्तों को भगवान वामन की मूर्ति बनाकर विधिवत उनकी पूजा अर्चना करनी चाहिए. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो जातक पूरे विधि विधान के साथ भगवान वामन की पूजा अर्चना करते हैं उन्हें सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है. और इसे लोगों को मृत्यु के उपरान्त स्वर्ग की प्राप्ति होती है.

वामन जयंती की कथा
भगवान विष्णु के कई अवतार में से वामन अवतार को बससे महत्वपूर्ण अवतारों में से एक माना गया है. उन्हें पांचवें अवतार के रूप में जाना जाता है. श्रीमद्भगवद पुराण बताया गया है कि देव और दैत्यों के युद्ध में जब देव पराजित होने लगे और असुर सेना अमरावती पर आक्रमण करने लगी.



तब इंद्रदेव भगवान विष्णु से सुरक्षा की मांग करने उनके शरण में जा पहुंचे. भगवान ने उन्हें धैर्य दिलाया और कहा कि वह माता अदिति के गर्भ से वामन के रूप में जन्म लेकर दैत्यराज बलि से देवताओं को मुक्ति दिलाएंगे. इसके बाद उचित समय पर महर्षि कश्यप के सहयोग से माता अदिति ने पयोव्रत का अनुष्ठान किया, ये अनुष्ठान पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है.

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन माता अदिति के गर्भ से भगवान विष्णु ने वामन देव के रूप में अवतरण लिया और ब्राह्मण-ब्रह्मचारी का रूप धारण कर लिया.

एक दिन भगवान राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने पहुंचे और भिक्षा में तीन पग भूमि मांगी. राजा बलि ने उन्हें तीन पग भूमि दान देने का वचन दिया. तब भगवान वामन ने विशाल रूप रखकर एक पग में स्वर्ग ओर दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया और अभी तीसरा पैर रखना शेष था. राजा बलि ने अपना सिर भगवान के आगे झुकाकर तीसरा पग सिर पर रखने के लिए कहा. भगवान के पैर रखते ही राजा बलि पाताल लोक पहुंच गए. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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