Varuthini Ekadashi 2021: वरुथिनी एकादशी पर न करें ये 5 काम, पढ़ें व्रत कथा

वरुथिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना और उनके प्रति समर्पण के भाव को दिखाता है.

Varuthini Ekadashi 2021: वरुथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा करने पर बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है.

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    Varuthini Ekadashi 2021: हिंदू धर्म में एकादशी (Ekadashi) का विशेष महत्व होता है. वैशाख माह में पड़ने वाली एकादशी का विशेष महत्व माना गया है. इसे वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन जो लोग विधि-विधान से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भगवान की कृपा उन पर बनी रहती है. वरुथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने पर बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. आज वरुथिनी एकादशी है. आइए आपको बताते हैं वरुथिनी एकादशी के दिन आपको कौन से काम नहीं करने चाहिए और पढ़ें कथा.

    वरुथिनी एकादशी पर न करें ये काम

    चावल न खाएं
    वरुथिनी एकादशी के दिन चावल नहीं खाने चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन चावल का सेवन करता है वह अगले जन्म में रेंगने वाले प्राणी के रूप में जन्म लेता है. इसलिए इस दिन चावल न खाएं. कहते हैं इस दिन चावल खाना मांस के सेवन करने के समान माना जाता है.

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    मांस-मछली और मदिरापान से रहें दूर
    एकादशी तिथि के दिन मांस-मछली और मदिरापान से परहेज करना चाहिए. जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखते हैं उन्हें दशमी तिथि के दिन भी इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. इसके साथ ही लहसुन, प्याज, गाजर, मूली, शलजम, गोभी, पालक और मसूर की दाल का सेवन भी न करें.

    संयम और सात्विक रहें
    वरुथिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना और उनके प्रति समर्पण के भाव को दिखाता है. एकादशी के दिन खान-पान और व्यवहार में संयम और सात्विकता का पालन करना चाहिए.

    क्रोध से दूर रहें
    एकादशी का दिन भगवान विष्णु की आराधना का दिन होता है इसलिए इस दिन सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए और शाम के वक्त सोना भी नहीं चाहिए. इसके अलावा इस दिन न तो क्रोध करना चाहिए और न ही झूठ बोलना चाहिए.

    कटु शब्दों या अपशब्द का इस्तेमाल न करें
    सभी तिथियों में एकादशी कि तिथि बहुत शुभ मानी जाती है. एकादशी का लाभ पाने के लिए इस दिन किसी को कठोर शब्द नहीं कहना चाहिए और न ही अपशब्द बोलने चाहिए. लड़ाई-झगड़े से बचना चाहिए.

    वरुथिनी एकादशी व्रत कथा
    एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की वरूथिनी एकादशी का व्रत के बारे में बताने का आग्रह किया. धर्म राज के आग्रह करने पर भगवान कृष्ण ने एकादशी व्रत कथा को बताया. उनके अनुसार, प्राचीनकाल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नामक एक राजा राज्य करता था. वह बहुत दानी और तपस्वी था. एक बार राजा जंगल में तपस्या करने चले गए. राजा तपस्या में लीन थे. एक सूअर आया और राजा को खीच कर घने जंगल के अन्दर में उठा ले गया. भालू का व्यवहार देखकर राजा बहुत डर गया और अपनी रक्षा के लिए मन ही मन भगवान विष्णु की प्रार्थना की. भक्त की पुकार सुनकर भगवान विष्णु वहां प्रकट हुए और भालू को मारकर राजा की रक्षा की. लेकिन भालू ने राजा का पैर खा चुका था. इसे लेकर राजा बहुत दुखी था.

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    तब भगवान विष्णु ने राज से कहा कि तुम दुखी मत हो. मथुरा जाकर वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की आराधना करो. ऐसा करने से तुम ठीक हो जाओगे. राजा ने मथुरा जाकर बहुत ही विधि-विधान से व्रत रख कर पूजा किया, जिसके पुण्य से राजा का पैर ठीक हो गया और वह सुन्दर शरीर वाला हो गया. मृत्यु के बाद राजा को मोक्ष की भी प्राप्ति हुई. इस प्रकार से जो भी वरूथिनी एकादशी व्रत रखता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष मिलता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)