Vat Purnima Vrat 2021: वट पूर्णिमा व्रत आज, इसके रखने से होती है सौभाग्य की प्राप्ति, जानें पूजा विधि

Vat Purnima Vrat 2021: वट पूर्णिमा व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है.

Vat Purnima Vrat 2021: सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन (Married Life) की कामना के साथ वट वृक्ष (Banyan Tree) के नीचे पूजा-अर्चना करती हैं. मान्‍यता है कि दांपत्य जीवन की परेशानियां भी इस व्रत को रखने से दूर हो जाती हैं.

  • Share this:
    Vat Purnima Vrat 2021: वट सावित्री व्रत या फिर वट पूर्णिमा का व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास माना जाता है. मान्यता है कि ये व्रत रखने से पति की आयु लंबी होती है और संकट दूर होते हैं. वहीं यह भी माना जाता है कि दांपत्य जीवन में चल रही परेशानियां भी इस व्रत को रखने से दूर हो जाती हैं. यही वजह है कि सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ वट यानी बरगद के वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि वट के वृक्ष के नीचे सावित्री के पति सत्यवान को जीवनदान मिला था. यही वजह है कि इस व्रत में वट के वृक्ष का पूजन करते हैं और इस पर सूत बांधते हैं. साथ ही वट पूर्णिमा के अवसर पर सावित्री (Savitri) और सत्यवान (Satyavan) की कथा सुनी जाती है.

    वट पूर्णिमा व्रत पूजा विधि
    वट पूर्णिमा व्रत के लिए महिलाएं सुबह उठकर स्‍नान कर नए वस्‍त्र पहनें और शृंगार करके निर्जला व्रत का संकल्‍प लेकर पूजा करें. इसके लिए सभी पूजन सामाग्री को एक स्थान पर एकत्रित कर लें और पूजा की थाली को सजा लें. फिर वट वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करके वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और वृक्ष को हल्‍दी, रोली और अक्षत लगाएं. इसके बाद फल और मिठाई अर्पित करें. इसके बाद वट के वृक्ष पर सूत को लपेटते हुए इसकी परिक्रमा करें और सत्‍यवान-सावित्री की कथा सुनें.

    इसे भी पढ़ें - अपनाएं वास्तु के ये खास उपाय, आएगी खुशहाली

    वट पूर्णिमा शुभ मुहूर्त
    ज्येष्ठ मास पूर्णिमा तिथि का आरंभ 24 जून, गुरुवार तड़के 3 बजकर 32 मिनट से होगा. वहीं ज्येष्ठ मास पूर्णिमा तिथि का समापन 25 जून, शुक्रवार अर्ध्य रात्रि 12 बजकर 9 मिनट पर होगा.

    इसे भी पढ़ें - मां लक्ष्‍मी इन 5 बातों से होती हैं नाराज, पूजन में न करें ये गलतियां

    वट सावित्री व्रत का महत्व
    सुहागिन महिलाएं सौभाग्य की प्राप्ति और पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत करती हैं. इस व्रत को बहुत ही श्रद्धा भाव से रखा जाता है. धार्मिक पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राणों की रक्षा की थी. वहीं मान्‍यता यह भी है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है और घर में सुख-समृद्धि आती है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.