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Vat Savitri Vrat 2020: 22 मई को है वट सावित्री व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

News18Hindi
Updated: May 20, 2020, 4:43 PM IST
Vat Savitri Vrat 2020: 22 मई को है वट सावित्री व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि
शादीशुदा महिलाएं इस दिन अपने सुहाग की दीर्घायु के लिए पूजा-अर्चना करती हैं और व्रत रखती हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो पत्नी (Wife) इस वट सावित्री व्रत को सच्ची निष्ठा से रखती है उसे न सिर्फ पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि उसके पति (Husband) पर आई सभी प्रकार की परेशानियां भी दूर हो जाती हैं.

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हिंदू धर्म (Hindu Religion) में महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए कई प्रकार के व्रत (Fast) रखती हैं. इन्हीं व्रतों में से एक है वट सावित्रि व्रत (Vat Savitri Vrat). शादीशुदा महिलाएं इस दिन अपने सुहाग की दीर्घायु के लिए पूजा-अर्चना करती हैं और व्रत रखती हैं. यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो पत्नी (Wife) इस व्रत को सच्ची निष्ठा से रखती है उसे न सिर्फ पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि उसके पति (Husband) पर आई सभी प्रकार की परेशानियां भी दूर हो जाती हैं.

वट सावित्री व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थीं. ऐसे में इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है. इस दिन वट (बड़, बरगद) के पेड़ का पूजन किया जाता है. इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं.

वट सावित्री व्रत शुभ मुहूर्त



अमावस्या तिथि प्रारंभ – मई 21, 2020 को रात 09:35 बजे


अमावस्या तिथि समाप्त – मई 22, 2020 को रात 11:08 बजे

वट सावित्री व्रत पूजा विधि
इस दिन सबसे पहले घर की सफाई कर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान कर लें. इसके बाद पवित्र जल का पूरे घर में छिड़काव करें. इसके बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य भरकर ब्रह्मा की मूर्ति की स्थापना करें. ब्रह्मा के वाम पार्श्व में सावित्री की मूर्ति स्थापित करें. इसी प्रकार दूसरी टोकरी में सत्यवान तथा सावित्री की मूर्तियों की स्थापना करें. इन टोकरियों को वट वृक्ष के नीचे ले जाकर रखें. इसके बाद ब्रह्मा तथा सावित्री का पूजन करें.

अब सावित्री और सत्यवान की पूजा करते हुए बड़ की जड़ में पानी दें. पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल तथा धूप का प्रयोग करें. जल से वटवृक्ष को सींचकर उसके तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेटकर तीन बार परिक्रमा करें. बड़ के पत्तों के गहने पहनकर वट सावित्री की कथा सुनें. भीगे हुए चनों का बायना निकालकर, नकद रुपए रखकर अपनी सास के पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. पूजा समाप्ति पर ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल, बांस के पात्र में रखकर दान करें. इस व्रत में सावित्री-सत्यवान की पुण्य कथा को सुनना न भूलें. यह कथा पूजा करते समय दूसरों को भी सुनाएं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: May 20, 2020, 4:43 PM IST
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