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Vat Savitri Vrat 2021: आज है वट सावित्री व्रत, पूजा के बाद पढ़ें सावित्री और सत्यवान की कथा

इस दिन महिलाएं अपने परिवार और जीवनसाथी की दीर्घायु की कामना करते हुए वट वृक्ष को भोग अर्पण करती हैं.

Vat Savitri Vrat 2021: कहते हैं कि माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज (Yamraj) से छुड़ाकर ले आई थीं. ऐसे में इस व्रत का महिलाओं (Women) के बीच विशेष महत्व बताया जाता है.

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    Vat Savitri Vrat 2021: आज वट सावित्री व्रत है. धार्मिक मान्यता अनुसार, जो भी महिला इस दिन सच्ची भावना से स्नान-ध्यान, दान, व्रत और पूजा-पाठ करती है, उसे समस्त देवी-देवता का आशीर्वाद निश्चित ही प्राप्त होता है. कहते हैं कि माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थीं. ऐसे में इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है. इस दिन वट (बरगद) के पेड़ का पूजन किया जाता है. इस दिन सुहागिनें वट वृक्ष का पूजन कर इसकी परिक्रमा लगाती हैं. महिलाएं सूत के धागे से वट वृक्ष को बांधकर इसके सात चक्‍कर लगाती हैं. इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं.

    वट सावित्री व्रत का उल्लेख पौराणिक ग्रंथों- स्कंद पुराण व भविष्योत्तर पुराण में भी विस्तार से मिलता है. महाभारत के वन पर्व में इसका सबसे प्राचीन उल्लेख मिलता है. महाभारत में जब युधिष्ठिर ऋषि मार्कंडेय से संसार में द्रौपदी समान समर्पित और त्यागमयी किसी अन्य नारी के न होने की बात कहते हैं, तब मार्कंडेय जी युधिष्ठिर को सावित्री के त्याग की कथा सुनाते हैं. इस दिन पूजा के बाद वट सावित्री की कथा जरूर पढ़ें व सुनें.

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    वट सावित्री कथा
    पुराणों में वर्णित सावित्री की कथा इस प्रकार है. राजर्षि अश्वपति की एकमात्र संतान थीं सावित्री. सावित्री ने वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को पति रूप में चुना लेकिन जब नारद जी ने उन्हें बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं, तो भी सावित्री अपने निर्णय से डिगी नहीं. वह समस्त राजवैभव त्याग कर सत्यवान के साथ उनके परिवार की सेवा करते हुए वन में रहने लगीं. जिस दिन सत्यवान के महाप्रयाण का दिन था, उस दिन वह लकड़ियां काटने जंगल गए और वहां मूर्छित होकर गिर पड़े.

    उसी समय यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए. तीन दिन से उपवास में रह रही सावित्री इस घड़ी को जानती थीं. वह बिना विकल हुए यमराज से सत्यवान के प्राण न लेने की प्रार्थना करने लगीं लेकिन यमराज नहीं माने. तब सावित्री उनके पीछे-पीछे ही जाने लगीं. कई बार मना करने पर भी वह नहीं मानीं, तो सावित्री के साहस और त्याग से यमराज प्रसन्न हुए और कोई तीन वरदान मांगने को कहा. सावित्री ने सत्यवान के दृष्टिहीन माता-पिता के नेत्रों की ज्योति मांगी, उनका छीना हुआ राज्य मांगा और अपने लिए 100 पुत्रों का वरदान मांगा.

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    तथास्तु कहने के बाद यमराज समझ गए कि सावित्री के पति को साथ ले जाना अब संभव नहीं. इसलिए उन्होंने सावित्री को अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दिया और सत्यवान को छोड़कर वहां से अंतर्धान हो गए. उस समय सावित्री अपने पति को लेकर वट वृक्ष के नीचे ही बैठी रहीं. इसीलिए इस दिन महिलाएं अपने परिवार और जीवनसाथी की दीर्घायु की कामना करते हुए वट वृक्ष को भोग अर्पण करती हैं. उस पर धागा लपेट कर पूजा करती हैं.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
    Published by:Purnima Acharya
    First published: