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कब है अखंड सौभाग्य वाला वट सावित्री व्रत? जानें तिथि, पूजा का मुहूर्त एवं महत्व

वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है.

वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है.

वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है. पति की लंबी आयु और सुखमय दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत रखते हैं. आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत की ति​थि, पूजा मुहूर्त आदि के बारे में.

सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है. वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं. इस दिन पति की लंबी आयु और सुखमय दांपत्य जीवन की कामना से व्रत रखा जाता है. पूजा के समय वट वृक्ष में कच्चा सूत भी लपेटते हैं. श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं वट सावित्री व्रत की ति​थि, पूजा मुहूर्त आदि के बारे में.

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वट सावित्री व्रत 2022 तिथि
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 29 मई दिन रविवार को दोपहर 02 बजकर 54 मिनट पर होगा. इस तिथि का समापन अगले दिन 30 मई सोमवार को शाम 04 बजकर 59 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर वट सावित्री व्रत 30 मई को रखा जाएगा.

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वट सावित्री व्रत 2022 पूजा मुहूर्त
वट सावित्री व्रत वाले दिन सुकर्मा योग सुबह से लेकर रात 11 बजकर 39 मिनट तक है. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 07 बजकर 12 मिनट से अगले दिन 31 मई मंगलवार को सुबह 05 बजकर 24 मिनट तक है.

वट सावित्री व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करना आपकी मनोकामनाओं की पूर्ति करने और कार्यों में सफलता प्रदान करने वाला है. यदि आपको वट सावित्री व्रत रखना है, तो आप सुबह 07:12 बजे के बाद से ही पूजा करें.

वट सावित्री व्रत वाले दिन का शुभ समय 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक है. इस अवधि में आप कोई भी शुभ मांगलिक कार्य कर सकते हैं.

वट सावित्री व्रत का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री अपने पति सत्यवान को पुन: जीवन देने के लिए यमराज को भी विवश कर दिया था. उनकी पतिव्रता धर्म से प्रभावित होकर यमराज ने उनके पति सत्यवान को प्राणदान दिया था, जिससे वे मृत्यु के बाद फिर से जीवित हो गए थे. पतिव्रता सावित्री की कथा अमर हो गई और तब से हर साल ज्येष्ठ अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाने लगा.

सुहागन महिलाएं वट सावित्री व्रत रखती हैं, ताकि उनके पति की उम्र लंबी हो. उनका वैवाहिक जीवन सुखमय हो, सभी संकट एवं कष्ट दूर हो जाएं. वट वृक्ष की पूजा करने से घर में सुख, शांति एवं समृद्धि आती है. धन का अभाव दूर होता है.

Tags: Dharma Aastha, धर्म

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