प्रयागराज में होती है वेणी दान प्रथा, जानिए क्‍या है ये और क्‍यों है इसका चलन

वेणी दान से पहले महिलाएं श्रृंगार कर वेणीमाधव की पूजा करती हैं. (सांकेतिक तस्‍वीर)
वेणी दान से पहले महिलाएं श्रृंगार कर वेणीमाधव की पूजा करती हैं. (सांकेतिक तस्‍वीर)

प्रयागराज (Prayagraj) में संगम तट पर वेणी दान (Veni Daan) करने की प्रथा होती है. अधिकतर महाराष्ट्र (Maharashtra) और दक्षिण भारतीय महिलाएं यह दान करती हैं. इस दान को करने से पहले महिलाएं श्रृंगार कर वेणीमाधव की पूजा करती हैं और संकल्प लेती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 29, 2020, 5:37 PM IST
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प्रयागराज (Prayagraj) में संगम तट पर वेणी दान (Veni Daan) करने की प्रथा का चलन है. प्रयागराज में सुहागिन और विधवा महिलाओं को मुंडन कराने का अधिकार है. संगम तट पर इस मुंडन को शुभ माना गया है. मुंडन के लिए किसी समय या मुहूर्त का कोई विचार नहीं है, लेकिन जो लोग मुहूर्त के अनुसार इस मुंडन को कराना चाहते हैं उनके लिए इसकी भी जानकारी उपलब्ध है. आइए जानते हैं क्या है वेणी दान और दक्षिण भारतीय महिलाएं क्यों यह दान करती हैं.

क्या है वेणी दान प्रथा
संगम के तट पर करवाया जाने वाले इस मुंडन का एक रूप वेणी दान माना जाता है. अधिकतर महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय महिलाएं यह दान करती हैं. इस दान को करने से पहले महिलाएं पूर्ण रुप से श्रृंगार कर वेणीमाधव की पूजा करती हैं और फिर विधि के तहत संकल्प लेती हैं. इसके बाद महिलाएं अपने बालों का तीन अंगुल भाग काटकर संगम तट पर वेणीमाधव को समर्पित करती हैं.

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दक्षिण भारतीय महिलाएं क्यों करती हैं वेणी दान


दक्षिण भारतीय महिलाओं के वेणी दान करने के पीछे के तर्क में यह मान्यता है कि ऐसा करके गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों को प्रसन्न किया जाता है. बताया जाता है कि भगवान वेणीमाधव के अनुसार जो महिलाएं इन तीनों नदियों में वेणी (चोटी) दान करती हैं, उन्हें सौभाग्य और लंबी आयु प्राप्त होगी. साथ ही संतान और संपत्ति का भी पूर्ण सुख प्राप्त होगा. वेणी दान करने से पति संग स्वर्ग का सुख भी प्राप्त होने की भी मान्यता है.

वेणी दान का इतिहास
प्रयाग महात्म्य में वर्णन किया गया है कि तीनों लोक के सभी देवता, यक्ष, नाग, किन्नर, गंधर्व अपनी पत्नियों के साथ इस तीर्थ के दर्शन कर चुके हैं. यहां आने के दौरान इन सभी ने ब्राह्मणों को वेणी दान किया था. ऐसी मान्यता है कि इनमें सबसे पहले सावित्री ने ब्रह्मा को अपनी तीन अंगुलियों के हिस्से के बराबर वेणी दान किया था.

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वेणी दान में इस मंत्र का होता है जाप
वेणी दान के लिए पहले 16 उपचारों से भगवान वेणीमाधव की पूजा विधि पूर्ण किए जाने की मान्यता है. इसके बाद अंगुली में वेणी (चोटी) रखकर इस मंत्र को जपना चाहिए. वेणी दान के लिए 16 उपचारों से वेणीमाधव की पूजा के दौरान अंगुली में चोटी रखकर इस मंत्र को पढ़ा जाता है.
नमोवेण्यै नमोवेण्यै नमोवेण्यै नमो नमः।
पातिव्रत्यं सदामहयमदेहि तुम्यं नमोनमः॥
मंत्र पढ़ने के साथ-साथ वेणी को जल दिया जाता है. फिर महिला अपने सुहाग की इच्छानुसार पूरा मुंडन या फिर चोटी ही दान करती हैं. भगवान वेणीमाधव के अनुसार इंसान के सभी पाप उसके बालों में लिप्त होते हैं. इसलिए उन्हें कटवा देने का प्रावधान इस दान क्रिया में जरूरी माना गया है. (Dclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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