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Vinayak Chaturthi 2020: विनायक चतुर्थी पर इस विधि से करें गणपति पूजन, बरसेगा सौभाग्य

Vinayak Chaturthi 2020: विनायक चतुर्थी पर इस विधि से करें गणपति पूजन, बरसेगा सौभाग्य

विनायक चतुर्थी पर गणेश भगवान की पूजा की जाती है

विनायक चतुर्थी पर गणेश भगवान की पूजा की जाती है

विनायक चतुर्थी २०२० (Vinayak Chaturthi 2020): खेल प्रारंभ हुआ तो तीन बार माता पार्वती जीत गई, लेकिन बालक ने कहा की महादेव जीते हैं. इससे नाराज होकर माता पार्वती ने बालक को कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया.

    विनायक चतुर्थी २०२० (Vinayak Chaturthi 2020): विनायक चतुर्थी आज मनाई जा रही है. आज के दिन भक्त विघ्नहर्ता गणेश भगवान की पूजा अर्चना करेंगे. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश भगवान भक्तों पर कृपा करते हैं और उनकी सभी विपदाओं का नाश करते हैं. गणपति के पूजन से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनके घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती है. हिंदू पंचाग के मुताबिक़, हर माह में दो बार चतुर्थी का व्रत आता है. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है.

    कैसे करें पूजा:
    सुबह जल्दी उठकर नित्यकर्म और स्नान करें. पूजाघर की साफ सफाई कर गणेश भगवान की पूजा अर्चना कारें. दोपहर के समय लाल रंग के वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लेने के बाद षोडशोपचार पूजन कर श्री गणेश की की आरती पढ़ें. इसके बाद गणेश भगवान् की मूर्ति 21 दूर्वा और सिन्दूर चढ़ाएं. इसके साथ ही ‘ॐ गं गणपतयै नम:’ मंत्र का जाप करते रहें. गणेश भगवान को बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं.

    विनायक चतुर्थी व्रत कथा

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय की बात है महादेव देवी पार्वती के साथ नदी किनारे बैठे हुए थे. तभी माता पार्वती भोलेनाथ से चौपड़ खेलने को आह्वान करती है. दोनों ने चौपड़ खेलना प्रारंभ किया. अब दोनों के बीच जीत-हार का निर्णय कौन करेगा. इसको लेकर समस्या हुई. इसका समाधान कैलाशपति ने निकाला और एक घास-फूस का बालक बना कर उसमें प्राण प्रतिष्ठा कर दी. उन्होंने उस बालक से कहा कि चौपड़ के इस खेल में जीत-हार का फैसला तुम करना.
    खेल प्रारंभ हुआ तो तीन बार माता पार्वती जीत गई, लेकिन बालक ने कहा की महादेव जीते हैं. इससे नाराज होकर माता पार्वती ने बालक को कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया. इस पर बालक माता पार्वती से माफी मांगने लगा और कहा कि उसने ऐसा जानबूझकर नहीं किया है. बालक के माफी मांगने पर देवी पार्वती ने कहा कि आज से एक साल बाद नागकन्याएं इस स्थान पर आएगी. उन नागकन्याओं के बताए अनुसार गणेश चतुर्थी का व्रत करने से तुम्हारे कष्ट खत्म हो जाएंगे. इसके बाद शाप से ग्रस्त बालक ने गणेश चतुर्थी का व्रत किया. श्रीगणेश उसकी उपासना से प्रसन्न हो गए और वर मांगने को कहा.

    बालके ने कहा कि हे प्रभु! मुझे इतनी शक्ति प्रदान करें कि मैं माता-पिता को देखने कैलाश पर्वत जा सकूं. श्रीगणेश से आशीर्वाद लेकर बालक कैलाश पर्वत पर पहुंच गया. चौपड़ के खेल से देवी पार्वती महादेव से नाराज हो गई थी. उनको मनाने के लिए महादेव ने भी 21 दिन तक गणेश चतुर्थी का व्रत किया और रुठी हुई देवी पार्वती को मनाया. इसके बाद माता पार्वती ने भी अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने के लिए गणेश चतुर्थी का व्रत किया और उनकी यह इच्छा पूर्ण हुई.

    Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

    Tags: Religion

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