Vivah Panchami 2020: विवाह पंचमी से मिलता है मनचाहा जीवनसाथी, मिटते हैं कुंडली के दोष, पढ़ें कथा


विवाह पंचमी की कथा पढ़ें

विवाह पंचमी की कथा पढ़ें

Vivah Panchami 2020: विवाह पंचमी के दिन ही भगवान राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था. इस दिन पूजा करने से जातक की कुंडली का दोष भी मिट जाता है. यह भी मान्यता है कि विवाह पंचमी के दिन जो जातक व्रत और पूजा करते हैं उन्हें मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 19, 2020, 9:04 AM IST
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Vivah Panchami 2020: आज विवाह पंचमी मनाई जा थी है है. हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को भगवान राम और माता सीता के विवाह का उत्सव हर साल मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विवाह पंचमी के दिन ही भगवान राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था. इस दिन पूजा करने से जातक की कुंडली का दोष भी मिट जाता है. यह भी मान्यता है कि विवाह पंचमी के दिन जो जातक व्रत और पूजा करते हैं उन्हें मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है. विवाह पंचमी को श्रीराम पंचमी या विहार पंचमी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन नागदेवता की पूजा अर्चना का विधान है.आइए जानते हैं विवाह पंचमी की पौराणिक कथा...

विवाह पंचमी की कथा

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार, सीता माता का जन्‍म धरती से हुआ था. कहा जाता है कि राजा जनक हल जोत रहे थे तब उन्‍हें एक बच्‍ची मिली और उसे वे अपने महल में लाए व पुत्री की तरह पालने लगे. उन्‍होंने उस बच्‍ची का नाम सीता रखा. लोग उन्‍हें जनक पुत्री सीता या जानकी कहकर पुकारते थे. मान्‍यता है कि माता सीता ने एक बार मंदिर में रखे भगवान शिव के धनुष को उठा लिया था. उस धनुष को परशुराम के अलावा किसी ने नहीं उठाया था. उसी दिन राजा जनक ने निर्णय लिया कि वो अपनी पुत्री का विवाह उसी के साथ करेंगे जो इस धनुष को उठा पाएगा. फिर कुछ समय बाद माता सीता के विवाह के लिए स्‍वयंवर रखा गया. स्‍वयंमर के लिए कई बड़े-बड़े महारथियों, राजाओं और राजकुमारों को निमंत्रण भेजा गया. उस स्‍वयंवर में महर्षि वशिष्‍ठ के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम राम और उनके छोटे भाई लक्ष्‍मण भी दर्शक दीर्घा में उपस्थित थे.

स्‍वयंवर शुरू हुआ और एक-एक कर सभी राजा, धुरंधर और राजकुमार आए लेकिन उनमें से कोई भी शिव के धनष को उठाना तो दूर उसे हिला भी नहीं सका. यह देखकर राजा जनक बेहद दुखी हो गए और कहने लगे कि क्‍या मेरी पुत्री के लिए कोई भी योग्‍य वर नहीं है. तभी महर्षि वशिष्‍ठ ने राम से स्‍वयंवर में हिस्‍सा लेकर धनुष उठाने के लिए कहा. राम ने गुरु की आज्ञा का पालन किया और एक बार में ही धनुष को उठाकर उसमें प्रत्‍यंचा चढ़ाने लगे, लेकिन तभी धनुष टूट गया. इसी के साथ राम स्‍वयंवर जीत गए और माता सीता ने उनके गले में वरमाला डाल दी. मान्‍यता है कि सीता ने जैसे ही राम के गले में वर माला डाली तीनों लोक खुशी से झूम उठे. यही वजह है कि विवाह पंचमी के दिन आज भी धूमधाम से भगवान राम और माता सीता का गठबंधन किया जाता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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