गंड मूल नक्षत्र क्या है? मघा नक्षत्र में पैदा होने वाले जातकों को मिलता है धन एवं सम्मान

 वैज्ञानिकों को ग्रहों की बीच धूल के बादलों (Dust Clouds) का स्रोत (Mars) के होने के प्रमाण मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

वैज्ञानिकों को ग्रहों की बीच धूल के बादलों (Dust Clouds) का स्रोत (Mars) के होने के प्रमाण मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

Gand Mool Nakshatra Know Detail-हिंदू धर्मशास्त्रों में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है, जिनमें से कुछ नक्षत्र शुभ हैं और कुछ अशुभ हैं. इन अशुभ नक्षत्रों को ही गंड मूल नक्षत्र कहा जाता है.

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Gand Mool Nakshatra Know Detail- आज यानी कि 5 मार्च की देर रात से 7 मार्च की देर शाम तक ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार , इस दौरान जन्मे जातक की नक्षत्र शांति कराना आवश्यक होता है. हिंदू धर्मशास्त्रों में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है, जिनमें से कुछ नक्षत्र शुभ हैं और कुछ अशुभ हैं. इन अशुभ नक्षत्रों को ही गंड मूल नक्षत्र कहा जाता है. ज्योतिष के अनुसार, इस श्रेणी में आने वाले नक्षत्र हैं अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती. इन नक्षत्रों का जातक पर शुभ और अशुभ, दोनों प्रभाव होता और इसका विचार कुंडली में इन छह नक्षत्रों में किसी एक में चंद्रमा की स्थिति, और नक्षत्र किस भाव में है, को देख कर किया जाता है. ठीक 27 दिन के बाद यह नक्षत्र पुन: आता है. आइए जानते हैं कैसे बनता है कैसे बनता है गण्डमूल योग, क्यों होता है गंडमूल नक्षत्र दोषकारी, गंडमूल दोष का प्रभाव....

कैसे बनता है गण्डमूल योग?
राशि और नक्षत्र के एक ही स्थान पर मिलने या उदय होने पर गण्डमूल नक्षत्रों का निर्माण होता है. जैसे-

यदि कर्क राशि तथा अश्लेषा नक्षत्र की समाप्ति साथ होती है. वही सिंह राशि का प्रारंभ और मघा नक्षत्र का उदय एक साथ हो तो इसे अश्लेषा गण्ड संज्ञक और मघा मूल संज्ञक नक्षत्र कहा जाता है
यदि वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र की समाप्ति एक साथ हो तथा धनु राशि और मूल नक्षत्र का आरम्भ यही से हो तो इस स्थिति को ज्येष्ठा गण्ड और ‘मूल’ मूल नक्षत्र कहा जाता है.



यदि मीन राशि और रेवती नक्षत्र एक साथ समाप्त हो तथा मेष राशि व अश्विनी नक्षत्र की शुरुआत एक साथ हो तो इस स्थिति को रेवती गण्ड और अश्विनी मूल नक्षत्र कहा जाता है

क्यों होता है गंडमूल नक्षत्र दोषकारी?
हिन्दू ज्योतिष के अनुसार नक्षत्र, लग्न और राशि के संधि काल को अशुभ माना जाता है और गंड मूल नक्षत्र संधि नक्षत्र होते हैं, इसलिए जातक पर इसके अशुभ प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है. इसके साथ ही गंडमूल नक्षत्रों के देवता भी बुरे प्रभाव देने वाले होते हैं. ये नक्षत्र मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु व मीन राशी के आरम्भ व अंत में आते हैं. काल पुरुष चक्र के अनुसार इन राशियों का प्रभाव जातक के शरीर, मन, बुद्धि, आयु, भाग्य आदि पर पड़ता है और गंडमूल का प्रभाव भी इन्हीं के ऊपर देखने को मिलता है.

गंडमूल दोष का प्रभाव
यदि कोई बालक गंडमूल नक्षत्र में पैदा होता है तो उसे तथा उसके परिजनों को निम्न कष्टों का सामना करना पडता है:-
-जातक को स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का सामना करना पड़ता है
-माता-पिता एवं भाई-बहनों के जीवन पर बाधाएं आती हैं
-जातक के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है
-जातक को जीवनयापन में संघर्ष करना पड़ता है
-जातक के परिवार में दरिद्रता आती है
-दुर्घटना का भय बना रहता है
-जातक भाग्यहीन हो जाता है

मघा नक्षत्र के पहले दो चरण में ही माता और पिता को कष्ट होता है, बाकी के दो चरणों में बच्चे को अच्छा-खासा धन और उच्चशिक्षा प्राप्त होती है. (साभार: astrosage)
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