क्या है भगवान विष्णु के कूर्म अवतार का रहस्य, समुद्र मंथन से जुड़ा है संबंध

गुरुवार को भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से जीवन के सभी संकटों से छुटकारा मिलता है.

हिन्दू पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के दस अवतार बताए गए हैं. इसलिए उन्हें दशावतार के नाम से भी जाना जाता है. उनके इन्हीं दस अवतारों में तीसरा कूर्म यानी कि कछुए का था.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:
    हिंदू धर्म में गुरुवार (Thursday) के दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है. कहते हैं सच्चे मन से उनकी पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं भगवान विष्णु जरूर पूरा करते हैं. हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार गुरुवार को भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से जीवन के सभी संकटों (Obstacles) से छुटकारा मिलता है. भगवान विष्णु जगत के पालनहार कहलाते हैं. कुछ दिनों पहले नेपाल में मिले एक विचित्र रंग के कछुए को जगत के पालनहार भगवान विष्णु के कूर्म अवतार से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल हाल ही में नेपाल के धनुषा जिले के धनुषधाम नगर निगम में एक गोल्डन रंग का कछुआ पाया गया है. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा जींस में परिवर्तन होने के कारण हो सकता है और इसी के कारण कछुए का रंग पीला है लेकिन लोगों द्वारा इसे आस्था से जोड़कर देखा जा रहा है.

    हिन्दू पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतार बताए गए हैं. इसलिए उन्हें दशावतार के नाम से भी जाना जाता है. उनके इन्हीं दस अवतारों में तीसरा कूर्म यानी कि कछुए का था. उन्होंने कूर्म का अवतार लेकर ही समुद्र मंथन में देवताओं की मदद की थी. इस संबंध में शास्त्रों में एक पौराणिक कथा का वर्णन मिलता है जो इस प्रकार है-

    इसे भी पढ़ेंः क्यों भगवान विष्णु को करने पड़े थे ये 8 छल, जानें इसके पीछे की कहानी

    एक बार महर्षि दुर्वासा ने देवताओं के राजा इंद्र को श्राप दे दिया था जिसके कारण वे श्रीहीन हो गए. श्राप से मुक्ति के लिए इंद्रदेव विष्णु जी के पास गए. तब जगत के पालन हार ने इंद्र को समुद्र मंथन करने के लिए कहा. ऐसे में इंद्रदेव भगवान विष्णु के कहे अनुसार असुरों व देवताओं के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने के लिए तैयार हो गए. समुद्र मंथन करने के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी और नागराज वासुकी को नेती बनाया गया. देवताओं और असुरों ने अपना मतभेद भुलाकर मंदराचल को उखाड़ा और उसे समुद्र की ओर ले चले, लेकिन वे उसे अधिक दूर तक ले नहीं जा सके.

    तब भगवान विष्णु ने मंदराचल को समुद्र तट पर रख दिया. देवता और दैत्यों ने मंदराचल को समुद्र में डालकर नागराज वासुकी को नेती बनाया.  लेकिन मंदराचल के नीचे कोई आधार नहीं होने के कारण वह समुद्र में डूबने लगा. यह देखकर भगवान विष्णु विशाल कूर्म का रूप धारण कर समुद्र में मंदराचल के आधार बन गए. भगवान कूर्म की विशाल पीठ पर मंदराचल तेजी से घूमने लगा और इस प्रकार समुद्र मंथन संपन्न हो सका. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.