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Saptarishi: कौन हैं तारामंडल के सप्तर्षि? जानें ब्रह्मा जी ने क्यों की थी इनकी उत्पत्ति

सप्तर्षियों की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा जी से जुड़ी है., Image- Canva

सप्तर्षियों की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा जी से जुड़ी है., Image- Canva

सप्तर्षि का मतलब सात ऋषि. मत्स्यपुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी ने संसार में धर्म की स्थापना के लिए अपने मस्तक से सप्तर्षिय ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

भगवान शिव सप्तर्षियों के गुरु बने थे.
ब्रह्माजी ने सप्तर्षियों की उत्पत्ति की थी.

Saptarishi Ki Kahani: धर्म ग्रंथों में गुरुओं का स्थान ईश्वर के समान बताया गया है. हर व्यक्ति अपने जीवन में किसी न किसी को अपना गुरु मानता है. पुराने युगों में ऋषि-मुनियों को ही गुरु माना जाता था. इन ऋषि-मुनियों में सप्तर्षियों को सबसे ऊंचे स्थान पर रखा गया. सनातन धर्म में सप्तर्षियों का विशेष स्थान है. आइए जानते हैं सप्तर्षि कौन थे और इनका जन्म कैसे हुआ?

कैसे हुई सप्तर्षियों की उत्पत्ति?
विष्णु पुराण और पद्म पुराण में सप्तर्षियों की महिमा बताई गई है. सप्तर्षि का मतलब सात ऋषि. मत्स्यपुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी ने संसार में धर्म की स्थापना करने और सनातन संस्कृति का ज्ञान बनाए रखने के लिए अपने मस्तक से सप्तर्षियों की उत्पत्ति की थी. भगवान शिव ने सप्तर्षियों का गुरु बनकर वेदों, ग्रंथो और पुराणों की शिक्षा दी.

पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि संसार में मनुष्यों को योग, विज्ञान, धर्म, वेद और पुराणों की शिक्षा देने और अपनी संस्कृति का ज्ञान कराने के लिए सप्तर्षियों को सबसे उच्चकोटि का गुरु बनाया गया. वेद संहिता में सप्तर्षियों को वैदिक धर्म का जनक माना जाता है.

कौन बने सप्तर्षि और इनका कार्य क्या रहा
अभी तक के युगों में वशिष्ठ, अत्रि, गौतम, कश्यप, जमदग्नि, भारद्वाज और विश्वामित्र ही महान ऋषि हुए हैं, जिनको सप्तर्षियों की उपाधि प्राप्त है. ऋषि वशिष्ठ राजा दशरथ के कुलगुरू थे. ऋषि अत्रि के आश्रम में प्रभु श्रीराम रुके थे. ऋषि गौतम ने अपनी पत्नी अहिल्या को पत्थर बन जाने का श्राप दिया था और श्रीराम ने उन्हे श्रापमुक्त किया था.

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ऋषि कश्यप की पत्नी अदिति ने देवताओं और दिति ने दैत्यों को जन्म दिया. ऋषि जमदग्नि भगवान परशुराम के पिता थे. ऋषि भारद्वाज ने आयुर्वेद जैसे महान ग्रंथ की रचना की थी. ऋषि विश्वामित्र भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के गुरु थे. ऋषि विश्वामित्र ने ही गायत्री मंत्र की रचना की थी. इस प्रकार सप्तर्षियों ने जनकल्याण में अपना अमूल्य योगदान दिया. आज के युग में ध्रुव तारे के चारों ओर फैले तारामंडल को ही सप्तर्षि माना जाता है.

Tags: Dharma Aastha, Dharma Culture

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