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कौन थे श्रीराम के सेनापति जामवंत? जानें ब्रह्मा जी और भगवान श्रीकृष्ण से उनका संबंध

ऋक्षराज जामवंत को ब्रह्मा जी का अंशावतार माना गया है, image-canva

ऋक्षराज जामवंत को ब्रह्मा जी का अंशावतार माना गया है, image-canva

ऋक्षराज जामवंत को ब्रह्मा का अंशावतार माना गया है. उन्होंने मत्स्य अवतार छोड़ श्रीकृष्ण तक सभी अवतारों का दर्शन किया है ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

उन्होंने मत्स्य अवतार छोड़ श्रीकृष्ण तक सभी अवतारों का दर्शन किया है.
त्रेतायुग में ये श्रीराम के सेनापति व द्वापर में श्रीकृष्ण के ससुर थे.

रावण से युद्ध के समय ऋक्षराज जामवंत भगवान राम की सेना के सेनापति थे. सीता की खोज के लिए उन्होंने ही समुद्र पार कर लंका जाने के लिए हनुमानजी को उनका बल याद दिलाया था, पर कम ही लोग जानते हैं कि वे भगवान ब्रह्मा के अवतार हैं, जिन्हें पौराणिक कथाओं के अनुसार अमर होने का वरदान है. उन्होंने मत्स्य अवतार को छोड़ कर कूर्म अवतार से लेकर श्रीकृष्ण अवतार तक सभी के दर्शन किये. वामन, राम व कृष्ण अवतारों  की कई कथाओं में उनका जिक्र मिलता है. विभिन्न पुराणों व मतों के आधार पर ऋक्षराज जामवंत की कथा इस प्रकार है. 

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ब्रह्मा के अंश थे जामवंत
पंडित रामचंद्र जोशी के अनुसार ऋक्षराज जामवंत को पुराणों में भगवान ब्रह्मा का अंशावतार कहा गया है. एक रूप से सृष्टि की रचना करते-करते दूसरे रूप से भगवान की आराधना, सेवा और सहायता के लिए भगवान ब्रह्मा जामवंत के रूप में अवतरित हुए थे. विष्णु पुराण में देवासुर संग्राम के समय इनका ब्रह्मा के पसीने व अग्नि पुराण में अग्नि पुत्र के रूप में गंधर्व कन्या से पैदा होने का उल्लेख है, जिन्हें अमर रहने का वरदान प्राप्त है. 

जामवंत व रामायण काल
जामवंत की त्रेतायुग में महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है. तुलसीदास व वाल्मीकि रामायण के अनुसार सीता की खोज के लिए जब समुद्र पार कर लंका जाने की किसी की हिम्मत न पड़ी, तो इन्होंने ही हनुमानजी को उनकी शक्तियां याद दिलाई थी.  रावण से युद्ध के समय सेनापति की भूमिका निभाकर बड़े-बड़े राक्षसों का वध भी किया. पौराणिक कथाओं के अनुसार अयोध्या पहुंचने पर घर लौटने से मना करते हुए ये भगवान श्रीराम के चरणों में गिर गए थे. इस पर श्रीराम ने द्वापर युग में श्रीकृष्ण के रूप में दर्शन देने का आश्वासन देकर उन्हें लौटाया था. 

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श्रीकृष्ण ने जामवंत की बेटी से किया विवाह
पंडित जोशी के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने जामवंत को उनके घर जाकर दर्शन दिया था. स्यमंतक मणि की खोज में वे जामवंत के घर गए थे. यहां मणि देने के लिए मना करते हुए जामवंत ने पहले तो उनसे युद्ध किया, फिर जब हारने लगा तो श्रीराम को पुकारा. तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें राम रूप में दर्शन दिए. इसके बाद स्यमंतक मणि के साथ जामवंत ने अपनी कन्या जामवंती भी श्रीकृष्ण को समर्पित कर उनका ससुर बनने का सौभाग्य प्राप्त किया. इसी तरह जामवंत के वामन अवतार में भी युवावस्था में होने का उल्लेख कई कथाओं में है.

Tags: Dharma Aastha, Hinduism, Ramayan

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