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पूजा में क्यों किया जाता है पान का उपयोग, जानें क्या कहते हैं पंडित जी

पूजा में क्यों किया जाता है पान का उपयोग, जानें क्या कहते हैं पंडित जी

सर्वप्रथम समुद्र देव की पूजा में पान के पत्ते का उपयोग किया गया था

सर्वप्रथम समुद्र देव की पूजा में पान के पत्ते का उपयोग किया गया था

Puja Mein Paan ka Upyog: हम सबने पूजा-पाठ (Puja-Path) के समय पान का उपयोग किया होगा या पंडितों को पान का उपयोग करते देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा-पाठ में पान (Paan) का उपयोग क्यों किया जाता है? हिन्दू पौराणिक कथाओं में पान के सर्वप्रथम उपयोग के बारे में उल्लेख मिलता है कि कैसे पान के पत्ते को पूजा में उपयोग किया गया और क्यों पान इतना महत्वपूर्ण है.

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Puja Mein Paan ka Upyog: हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ में भगवान को अर्पण (Offering to God) करने के लिए अनेकों प्रकार की सामग्री इस्तेमाल की जाती है, और सभी चीज़ों का अपना अलग महत्त्व होता है. जिसे भगवान को अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं, और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं. इनमें से ही एक सामग्री है पान या पान का पत्ता. हम सबने पूजा-पाठ (Puja-Path) के समय पान का उपयोग किया होगा या पंडितों को पान का उपयोग करते देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा-पाठ में पान (Paan) का उपयोग क्यों किया जाता है? हिन्दू पौराणिक कथाओं में पान के सर्वप्रथम उपयोग के बारे में उल्लेख मिलता है कि कैसे पान के पत्ते को पूजा में उपयोग किया गया और क्यों पान इतना महत्वपूर्ण है. आइए जानते हैं

सबसे पहले पान के पत्ते का उपयोग
पौराणिक कथा के अनुसार जब देवताओं और दैत्यों ने समुद्र मंथन किया था. तब सर्वप्रथम समुद्र देव की पूजा में पान के पत्ते का उपयोग किया गया था. इसलिए तब से यह प्रथा लगातार चली आ रही है.

एक अन्य मान्यता के अनुसार
एक अन्य मान्यता के अनुसार पान के पत्ते में देवी-देवताओं का वास माना गया है. इसलिए सारे विधि-विधान के साथ ही पान के पत्ते का उपयोग पूजा में किया जाता है.

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पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बताते हैं कि पान के ऊपरी हिस्से में इंद्रदेव का स्थान होता है, वहीं पान के मध्य भाग में माता सरस्वती विराजमान होती है, और इसके सबसे निचले हिस्से में मां लक्ष्मी का वास होता है, इसके साथ ही पान के अंदरूनी हिस्से में भगवान श्री हरी विष्णु का और बाहरी हिस्से में भगवान शंकर और कामदेव का स्थान होता है. इसके अलावा सूर्य देव पान के पत्ते में हर जगह उपस्थित होते हैं. सभी देवी-देवताओं की उपस्तिथि होने के कारण ही पान के पत्ते को विधिवत पूजन में इस्तेमाल किया जाता है.

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ऐसा माना जाता है कि पान के पत्ते को शिवलिंग पर अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. साथ ही मंगलवार या शनिवार को महाबली हनुमान को डंडी वाला पान का पत्ता चढ़ाने से सभी रुके कार्य सुचारु ढंग से गतिशील हो जाते है, ऐसी मान्यता है कि यदि आप किसी अच्छे काम के लिए रविवार को घर से निकल रहे हों तो पान का पत्ता साथ रखकर घर से बाहर कदम रखना चाहिए. यह व्यक्ति के सभी रुके हुए कार्यों को सम्पन्न करने में उपयोगी साबित होता है. पूजा पाठ में पान के पत्ते का इस्तेमाल करने के पीछे एक कारण यह भी है कि पान का पत्ता नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है और पूजा में इसके उपयोग से किसी भी प्रकार का विघ्न नहीं होता.

Tags: Religion

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