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भगवान श्री कृष्ण को क्यों लगाया जाता है छप्पन भोग? जानें पौराणिक कथा

बाल लीला करने और नटखट मिजाज के चलते श्री कृष्ण की प्रसिद्धि बाल्यकाल से ही थी

बाल लीला करने और नटखट मिजाज के चलते श्री कृष्ण की प्रसिद्धि बाल्यकाल से ही थी

Krishna Ko 56 Bhog: आज भी जब हम कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Jnamashtmi) मनाते हैं, तो लड्डू गोपाल को 56 प्रकार के भोग लगा ...अधिक पढ़ें

    Krishna Ko 56 Bhog: हम सभी को भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण (Lord Krishna) के बारे पता है. भगवान श्री कृष्ण को हम कई अन्य नामों से भी जानते हैं. बचपन से बाल लीला करने और नटखट मिजाज के चलते श्री कृष्ण की प्रसिद्धि बाल्यकाल से ही थी. श्री कृष्ण ने कंस वध से लेकर कुरुक्षेत्र (Kurukshetra) की रणभूमि तक में मानव को जीवन जीने की कला सिखाई. आज गीता का ज्ञान कलयुग में मनुष्यों के लिए मोक्ष का एक मार्ग है और. हर व्यक्ति गीता के ज्ञान को अपने में समाहित करना चाहता है. भगवान श्री कृष्ण बचपन से ही खाने के बड़े शौकीन थे, और आज भी जब हम कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Jnamashtmi) मनाते हैं, तो लड्डू गोपाल को 56 प्रकार के भोग लगाए जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्यों भगवान श्री कृष्ण को 56 प्रकार के भोग लगाए जाते हैं. यदि नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते है कि आखिर क्यों भगवान श्री कृष्ण को 56 प्रकार के भोग लगाए जाते हैं

    इसलिए लगाया जाता है 56 भोग
    जैसा कि हम सभी जानते है भगवान श्री कृष्ण का बाल्यकाल गोकुल में बीता. उनकी माता यशोदा उन्हें प्रतिदिन आठ प्रहर मतलब दिन में आठ बार भोजन कराती थीं. ऐसा वृतांत मिलता है कि एक बार देवराज इंद्रा गोकुल वासियों से रुष्ट हो गए और उन्होंने गोकुल पर बारिश का कहर बरसाया.

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    तब भगवान श्री कृष्णा ने सात दिनों तक बिना खाये-पिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली में उठाये रखा और सातवें दिन जब बारिश रुक गई और गोकुल वासी गोवर्धन के नीचे से निकल आये तब उन्हें ध्यान आया कि कान्हा ने तो सात दिनों से कुछ खाया ही नहीं है. तब माता यशोदा और सभी गोकुलवासियों ने श्री कृष्ण के लिए सात दिन और आठ प्रहर (7 दिन X 8 पहर = 56) के हिसाब से छप्पन प्रकार के अलग अलग पकवान बनाये और लड्डू गोपाल को खिलाए.

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    अन्य मान्यता के अनुसार
    एक अन्य मान्यता के अनुसार एक बार गोकुल की गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए एक माह तक लगातार यमुना नदी में स्नान किया, और माता कात्यायनी की पूरी श्रद्धा से पूजा की. ताकि श्री कृष्ण ही उन्हें पति रूप में मिले. श्री कृष्ण को जब यह बात पता चली तो श्री कृष्ण ने सभी गोपियों को उनकी इच्छापूर्ति होने का आश्वासन दिया. इसी बात से प्रसन्न होकर सभी गोपियों ने श्री कृष्ण के लिए अलग अलग छप्पन प्रकार के व्यंजन बनाये. छप्पन भोग में वही व्यंजन होते हैं जो मुरली मनोहर को पंसद थे. आमतौर पर इसमें अनाज, फल, ड्राई फ्रूट्स, मिठाई, पेय पदार्थ, नमकीन और अचार जैसी चीजे़ं शामिल होती हैं.

    (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

    Tags: Religion, धर्म

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