शनिवार को शनि देव को क्यों चढ़ाया जाता है तेल, जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

शनि देव को तेल अर्पित करने के विषय में दो पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं.

शनि देव को तेल अर्पित करने के विषय में दो पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं.

Lord Shani Dev Puja: मान्यता है कि हर शनिवार (Saturday) को शनि देव को तेल (Oil) अर्पित किया जाता है और उस तेल में अपना चेहरा देखा जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 17, 2021, 6:22 AM IST
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Lord Shani Dev Puja: शनि (Shani) की साढ़ेसाती के दौरान शनिवार (Saturday) को व्रत रखना लाभदायक होता है. व्रत रखने के साथ-साथ शनिवार की व्रत कथा (Vrat Katha) पढ़ना और सुनना भी शुभ होता है. शरीर से रोग और भाग्य से कष्ट दूर करने के लिए शनिवार के दिन शनि देव के लिए व्रत अवश्य रखें, इससे शनि की दशा, साढ़ेसाती और ढैय्या में लाभ मिलता है. मान्यता है कि हर शनिवार को शनि देव को तेल अर्पित किया जाता है और उस तेल में अपना चेहरा देखा जाता है. इसका उल्लेख शास्त्रों और पुराणों में मिला है. आइए जानते हैं कि पुराणों के अनुसार, शनि देव को तेल अर्पित करने का महत्व क्या है और इस तेल में अपना चेहरा क्यों देखा जाता है.

शनि देव को तेल अर्पित करने के विषय में दो पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. एक कथा के अनुसार, शनि देव को अपनी शक्ति और पराक्रम पर बहुत अहम हो गया था. उस काल में ही राम भक्त बजरंगबली के पराक्रम और बल की हर ओर चर्चा होती थी. जब शनि देव को इस बात का पता चला तो वो हनुमान जी से युद्ध करने के लिए निकल पड़े. वहां उन्होंने देखा कि हनुमानजी एकांत में बैठकर श्री राम की भक्ति में लीन हैं. शनिदेव ने हनुमानजी को युद्ध के लिए ललकारा. हनुमान जी ने समझाते हुए कहा कि अभी वो अपने प्रभु श्री राम का ध्यान कर रहे हैं. हनुमान जी ने शनि देव को जाने के लिए कहा. परन्तु शनि देव उन्हें युद्ध के लिए ललकारते रहे और हनुमानजी के बहुत समझाने पर भी नहीं माने. शनि देव युद्ध की बात पर अड़े रहे तब हनुमानजी ने फिर से समझाते हुए कहा कि मेरा राम सेतु की परिक्रमा का समय हो रहा है आप कृपया यहां से चले जाइए. शनि देव के न मानने पर हनुमान जी ने शनि देव को अपनी पूंछ में लपेट लिया और राम सेतु की परिक्रमा आरम्भ कर दी.

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शनि देव का पूरा शरीर धरती और रास्ते में आई चट्टानों से घिसता जा रहा था और उनका पूरा शरीर घायल हो गया. उनके शरीर से रक्त निकलने लगा और बहुत अधिक पीड़ा होने लगी. तब शनिदेव ने हनुमान जी से क्षमा मांगते हुए कहा कि मुझे अपनी उदंडता का परिणाम मिल गया है. कृपया मुझे मुक्त कर दें. तब हनुमान जी ने कहा कि यदि मेरे भक्तों की राशि पर तुम्हारा कोई दुष्परिणाम नहीं होने का वचन दो तो मैं तुम्हे मुक्त कर सकता हूं. शनि देव ने वचन देते हुए कहा कि आपके भक्तों पर मेरा कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा. तब हनुमानजी ने शनि देव को मुक्त किया और उनके घायल शरीर पर तेल लगाया जिससे शनिदेव को पीड़ा में आराम मिला. तब शनि देव ने कहा कि जो व्यक्ति मुझे तेल अर्पित करेंगे उनका जीवन समृद्ध होगा और मेरे कारण कोई कष्ट नहीं होगा और तबसे ही शनि देव को तेल अर्पित करने की परंपरा का प्रारम्भ हुआ.
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दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार, रावण ने एक बार सभी ग्रहों को अपने अनुसार राशि में बैठाया परन्तु शनि देव ने रावण की बात मानने से मना कर दिया इसलिए रावण ने उन्हें उल्टा लटका दिया. इसके पश्चात हनुमानजी लंका पहुंचे तब रावण ने हनुमान जी की पुंछ में आग लगा दी .हनुमानजी ने उड़ कर सारी लंका को जला दिया. आग लगने के बाद सभी बंदी ग्रह भाग गए परन्तु उल्टा लटका होने के कारण शनिदेव नहीं भाग पाए. शनिदेव की देह में बहुत पीड़ा हो रही थी. तब हनुमान जी ने शनि देव को तेल लगाया जिससे शनि देव की पीड़ा कुछ कम हुई. इसके पश्चात शनि देव ने कहा कि आज से मुझे तेल अर्पित करने वाले सभी व्यक्तियों की पीड़ा को मैं हर लूंगा. तब से ही शनि देव को तेल अर्पित किया जाने लगा. शनि देव को तेल चढ़ाते समय उस तेल में चेहरा देखने से शनि दोषों से मुक्ति प्राप्त होती है और समृद्धि का आगमन होता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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