चंद्रमा और सूर्य पर ही क्यों लगता है ग्रहण, जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

चंद्रमा और सूर्य पर ही क्यों लगता है ग्रहण, जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा
चंद्रग्रहण को यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में देखा गया

पौराणिक कथा (Mythology) के मुताबिक़ समुद्र मंथन के दौरान देवों और दानवों के बीच अमृत पान को लेकर विवाद (Dispute) चल रहा था. यही विवाद राहु (Rahu) और केतु (Ketu) के जन्म का कारण बना. उसके बाद से ये दोनों ग्रहण होते हैं.

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चंद्रग्रहण पांच जुलाई को हुआ. इस चंद्र ग्रहण को यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में देखा गया. इसकी तस्वीरें विभिन्न माध्यमों से भारत तक पहुंची हैं. यह चंद्रग्रहण भारतीय समय के अनुसार सुबह 8 बजकर 37 मिनट से शुरू हुआ है और करीब 02 घंटे 43 मिनट 24 सेकंड बाद 11 बजकर 22 मिनट पर खत्म हो गया. इस ग्रहण का असर भारत पर नहीं पड़ा क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया.

चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथाएं
पौराणिक कथा के मुताबिक़ समुद्र मंथन के दौरान देवों और दानवों के बीच अमृत पान को लेकर विवाद चल रहा था. इस पर भगवान विष्णु ने मोहिनी एकादशी के दिन एक मोहिनी का रूप धारण किया, जिससे कि विवाद शांत हो जाये और अमृत देवताओं को मिल जाए. इसके लिए भनवान विष्णु ने अमृत को देवताओं और असुरों के बीच बराबर भागों में बांटने की बात कही.

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इसके लिए उन्होंने दोनों को राजी कर लिया. उसके बाद भगवान विष्णु ने देवों और असुरों को अलग–अलग लाइन में बैठा दिया. परन्तु असुरों को भगवान विष्णु की चाल समझ में आ गई. उसमें से एक असुर ने देवता का रूप धारण कर देवतों की लाइन में बैठ गया. इसे भगवान विष्णु जान नहीं पाए.



असुर की इस चालाकी को सूर्य और चंद्रमा ने भगवान विष्णु से बता दिया. इस पर विष्णु भगवान को क्रोध आया और अपने सुदर्शन चक्र से उस राक्षस का गला काट दिया. चूंकि वह अमृतपान कर चुका था इसलिए उसकी मृत्यु नहीं हुई. इसके सर वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु बन गया. तभी से राहु-और केतु, सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानने लगे. ये राहु और केतु पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को ग्रस लेते हैं. इसलिए चंद्रग्रहण होता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इसके लिए संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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