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हजारों किलोमीटर से प्रयागराज संगम आकर महिलाएं करती हैं वेणी दान, जानें मुंडन संस्कार का महत्व और इतिहास

दक्षिण भारत से महिलाएं प्रयागराज संगम पर आकर मुंडन (Veni Daan) करवाती हैं.
दक्षिण भारत से महिलाएं प्रयागराज संगम पर आकर मुंडन (Veni Daan) करवाती हैं.

Veni Daan Importance: दक्षिण भारतीय महिलाओं (South Indian Women) के वेणी दान (Veni Daan) करने के पीछे के तर्क में यह मान्यता है कि ऐसा करके गंगा Ganges), यमुना (Yamuna) और सरस्वती नदियों को प्रसन्न किया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 26, 2021, 2:43 PM IST
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Paush Purnima 2021: प्रयागराज माघ मेला 2021 (Magh Mela 2021 Prayagraj ) के माघ मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. पौष पूर्णिमा 28 जनवरी को है. पौष पूर्णिमा के दिन स्नान के साथ ही कल्पवास की शुरुआत भी हो जाएगी. प्रयागराज में इस माह में लगने वाला कुंभ और माघ मेला अपने आप में कई संस्कृतियां, मान्यताएं समेटे हुए हैं. हजारों किलोमीटर दूर से लोग प्रयागराज माघ मेला 2021 और कुंभ मेले में भाग लेने और गंगा स्नान का पुण्य लेने आते हैं. इस समय दक्षिण भारत के लोग भी संगम तट पर आते हैं. दक्षिण भारतीय महिलाएं संगम तट पर आकर वेणी दान करती हैं. वेणी दान को मुंडन संस्कार कहा जाता है. प्रयागराज में सुहागिन और विधवा महिलाओं को मुंडन कराने का अधिकार है. संगम तट पर इस मुंडन को शुभ माना गया है. मुंडन के लिए किसी समय या मुहूर्त का कोई विचार नहीं है, लेकिन जो लोग मुहूर्त के अनुसार इस मुंडन को कराना चाहते हैं उनके लिए इसकी भी जानकारी उपलब्ध है. आइए जानते हैं क्या है वेणी दान और दक्षिण भारतीय महिलाएं क्यों यह दान करती हैं.

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वेणी दान प्रथा क्या है ? 
संगम के तट पर करवाया जाने वाले इस मुंडन का एक रूप वेणी दान माना जाता है. अधिकतर महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय महिलाएं यह दान करती हैं. इस दान को करने से पहले महिलाएं पूर्ण रुप से श्रृंगार कर वेणीमाधव की पूजा करती हैं और फिर विधि के तहत संकल्प लेती हैं. इसके बाद महिलाएं अपने बालों का तीन अंगुल भाग काटकर संगम तट पर वेणीमाधव को समर्पित करती हैं.
दक्षिण भारतीय महिलाएं क्यों करती हैं वेणी दान


दक्षिण भारतीय महिलाओं के वेणी दान करने के पीछे के तर्क में यह मान्यता है कि ऐसा करके गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों को प्रसन्न किया जाता है. बताया जाता है कि भगवान वेणीमाधव के अनुसार जो महिलाएं इन तीनों नदियों में वेणी (चोटी) दान करती हैं, उन्हें सौभाग्य और लंबी आयु प्राप्त होगी. साथ ही संतान और संपत्ति का भी पूर्ण सुख प्राप्त होगा. वेणी दान करने से पति संग स्वर्ग का सुख भी प्राप्त होने की भी मान्यता है.

वेणी दान का इतिहास
प्रयाग महात्म्य में वर्णन किया गया है कि तीनों लोक के सभी देवता, यक्ष, नाग, किन्नर, गंधर्व अपनी पत्नियों के साथ इस तीर्थ के दर्शन कर चुके हैं. यहां आने के दौरान इन सभी ने ब्राह्मणों को वेणी दान किया था. ऐसी मान्यता है कि इनमें सबसे पहले सावित्री ने ब्रह्मा को अपनी तीन अंगुलियों के हिस्से के बराबर वेणी दान किया था.

वेणी दान में इस मंत्र का होता है जाप
वेणी दान के लिए पहले 16 उपचारों से भगवान वेणीमाधव की पूजा विधि पूर्ण किए जाने की मान्यता है. इसके बाद अंगुली में वेणी (चोटी) रखकर इस मंत्र को जपना चाहिए. वेणी दान के लिए 16 उपचारों से वेणीमाधव की पूजा के दौरान अंगुली में चोटी रखकर इस मंत्र को पढ़ा जाता है.

नमोवेण्यै नमोवेण्यै नमोवेण्यै नमो नमः।
पातिव्रत्यं सदामहयमदेहि तुम्यं नमोनमः॥

मंत्र पढ़ने के साथ-साथ वेणी को जल दिया जाता है. फिर महिला अपने सुहाग की इच्छानुसार पूरा मुंडन या फिर चोटी ही दान करती हैं. भगवान वेणीमाधव के अनुसार इंसान के सभी पाप उसके बालों में लिप्त होते हैं. इसलिए उन्हें कटवा देने का प्रावधान इस दान क्रिया में जरूरी माना गया है. (Dclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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