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शनिवार को इस विधि से करनी चाहिए पीपल के पेड़ की पूजा, खत्म हो जाएंगे सभी क्लेश

News18Hindi
Updated: February 7, 2020, 1:27 PM IST
शनिवार को इस विधि से करनी चाहिए पीपल के पेड़ की पूजा, खत्म हो जाएंगे सभी क्लेश
शास्त्रों में पीपल की पूजा को बहुत चमत्कारी माना गया है.

मान्यताओं के अनुसार, शनिवार के दिन प्रातः काल पीपल के पेड़ में जल अर्पित करने से मन को शांति प्राप्त होती है.

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  • Last Updated: February 7, 2020, 1:27 PM IST
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भारतीय संस्कृति में पुराण, पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. शास्त्रों में पीपल की पूजा को बहुत चमत्कारी माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि पीपल के पेड़ में कई देवी-देवताओं का वास होता है. किसी विशेष दिन पीपल की पूजा की जाए तो व्यक्ति की सभी आर्थिक, मानसिक और घरेलू समस्याओं का निदान हो जाता है. इस कारण सदियों से शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है.

मन को मिलती है शांति
मान्यताओं के अनुसार, शनिवार के दिन प्रातः काल पीपल के पेड़ में जल अर्पित करने से मन को शांति प्राप्त होती है. शनिवार के दिन सूर्योदय से पहले पीपल के जल में जल अर्पित करने और पीपल के पेड़ की प्रक्रिमा करनी चाहिए.

शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दिया जलाना चाहिए
शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दिया जलाना चाहिए


इस विधि से करें पूजा
शनिवार के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि करके शनिदेन की विधिवत पूजा करें. इसके बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दिया जलाएं. इसके बाद पीपल के पेड़ से कुछ पत्तों को तोड़कर, गंगाजल से इसे धोएं और ले आएं.

अब पानी में हल्दी डालकर एक गाढ़ा घोल तैयार करें और दाएं हाथ की अनामिका अंगुली से इस घोल को लेकर पीपल के पत्‍ते पर ह्रीं लिखें. इसके बाद पूजा स्थान पर इस पीपल के पेड़ के पत्ते की पूजा करें. मान्यताओं के अनुसार पीपल के पत्ते की पूजा करने से ईष्टदेव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं.
शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होता है.
शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होता है.


पर्स में रखें पत्ता
पूजा के पश्चात इस पत्ते को अपने पर्स या तिजोरी में रखें. कुछ सप्ताह तक लगातार यह काम करें.
कुछ हफ्ते तक इस उपाय को करने धन की समस्‍या दूर होने लगती है.

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शनिवार को करें इन मंत्रों का जाप

ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:

सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:

कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:

ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:

मंत्र- ॐ ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:

शनि का तंत्रोक्त मंत्र- ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: February 7, 2020, 1:24 PM IST
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