Shirdi Sai Baba Mantra: साईं बाबा भर देंगे खुशियों से झोली, गुरुवार को पढ़ें ये मंत्र


गुरुवार को करें साईं बाबा के इन मंत्रों का जाप (credit: instagram/sai_shraddha_saburi)

गुरुवार को करें साईं बाबा के इन मंत्रों का जाप (credit: instagram/sai_shraddha_saburi)

Shirdi Sai Baba Mantra Chant On Thursday-शिरडी के साईं बाबा (Shirdi Sai Baba) की जो भी मन से पूजा करता है या फिर उन्हें केवल याद करता है, वह उनकी झोली खुशियों से भर देते हैं. साईं बाबा की हर कोई पूजा कर सकता है, चाहे वह किसी भी जाति (Caste) या धर्म (Religion) से क्यों न हो...

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 25, 2021, 2:07 PM IST
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Shirdi Sai Baba Mantra Chant On Thursday- गुरुवार (Thursday) का दिन साईं बाबा को समर्पित है और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए लोग इस दिन व्रत (Fast) रखते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शिरडी के साईं बाबा (Shirdi Sai Baba) की जो भी मन से पूजा करता है या फिर उन्हें केवल याद करता है, वह उनकी झोली खुशियों से भर देते हैं. साईं बाबा की हर कोई पूजा कर सकता है, चाहे वह किसी भी जाति (Caste) या धर्म (Religion) से क्यों न हो, वह हर किसी की मनोकामना पूरी करते हैं. गुरुवार के दिन यदि साईं बाबा के इन मंत्रों का 108 बार जाप किया जाए तो जीवन में खुशियां आती हैं और हर प्रकार के कष्ट और बाधाओं से मुक्ति मिलती है...

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सांईंबाबा के खास मंत्र:

- ॐ सांईं राम.
- ॐ सांईं गुरुदेवाय नम:.

-सबका मालिक एक है.

- ॐ सांईं देवाय नम:.



-ॐ शिर्डी देवाय नम:.

-ॐ समाधिदेवाय नम:.

-ॐ सर्वदेवाय रूपाय नम:.

-ॐ शिर्डी वासाय विद्महे सच्चिदानंदाय धीमहि तन्नो सांईं प्रचोदयात.

- ॐ साईं नमो नम:, श्री साईं नमो नम:, जय जय साईं नमो नम:, सद्गुरु साईं नमो नम:.

-ॐ अजर अमराय नम:.

- ॐ मालिकाय नम:.

-जय-जय सांईं राम.

-ॐ सर्वज्ञा सर्व देवता स्वरूप अवतारा.

साईं चालीसा




पहले साईं के चरणों में, अपना शीश नमाऊं मैं।


कैसे शिरडी साईं आए, सारा हाल सुनाऊं मैं॥




कौन है माता, पिता कौन है, ये न किसी ने भी जाना।


कहां जन्म साईं ने धारा, प्रश्न पहेली रहा बना॥




कोई कहे अयोध्या के, ये रामचंद्र भगवान हैं।


कोई कहता साईं बाबा, पवन पुत्र हनुमान हैं॥




कोई कहता मंगल मूर्ति, श्री गजानंद हैं साईं।


कोई कहता गोकुल मोहन, देवकी नंदन हैं साईं॥




शंकर समझे भक्त कई तो, बाबा को भजते रहते।


कोई कह अवतार दत्त का, पूजा साईं की करते॥




कुछ भी मानो उनको तुम, पर साईं हैं सच्चे भगवान।


बड़े दयालु दीनबंधु, कितनों को दिया जीवन दान॥




कई वर्ष पहले की घटना, तुम्हें सुनाऊंगा मैं बात।


किसी भाग्यशाली की, शिरडी में आई थी बारात॥




आया साथ उसी के था, बालक एक बहुत सुंदर।


आया, आकर वहीं बस गया, पावन शिरडी किया नगर॥




कई दिनों तक भटकता, भिक्षा मांग उसने दर-दर।


और दिखाई ऐसी लीला, जग में जो हो गई अमर॥




जैसे-जैसे उमर बढ़ी, बढ़ती ही वैसे गई शान।


घर-घर होने लगा नगर में, साईं बाबा का गुणगान॥




दिग दिगंत में लगा गूंजने, फिर तो साईं जी का नाम।


दीन-दुखी की रक्षा करना, यही रहा बाबा का काम॥




बाबा के चरणों में जाकर, जो कहता मैं हूं निर्धन।


दया उसी पर होती उनकी, खुल जाते दुख के बंधन॥




कभी किसी ने मांगी भिक्षा, दो बाबा मुझको संतान।


एवमस्तु तब कहकर साईं, देते थे उसको वरदान॥




स्वयं दुखी बाबा हो जाते, दीन-दुखीजन का लख हाल।


अंत:करण श्री साईं का, सागर जैसा रहा विशाल॥


(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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