रविवार को इन 7 शक्तिशाली मंत्रों से करें सूर्य देव की आराधना, पूरी होगी मनोकामना

यदि सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं तो जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सभी बिगड़े काम भी बनने लगते हैं.

यदि सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं तो जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सभी बिगड़े काम भी बनने लगते हैं.

Surya Dev Mantra: रविवार (Sunday) को सूर्य पूजन और सूर्य मंत्र का 108 बार जाप करने से लाभ मिलता है. ये सूर्य मंत्र आपकी समस्त मनोकामना पूर्ण करने में आपकी सहायता करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 21, 2021, 6:59 AM IST
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Surya Dev Mantra: हिंदू धर्म में पंचदेवों में से सूर्य देव भी एक माने गए हैं. वहीं ज्योतिष में भी सूर्य का बहुत महत्व माना गया है. ज्योतिष के अनुसार सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है. यह मनुष्य के जीवन में मान-सम्मान, पिता-पुत्र और सफलता का कारक माना गया है. ज्योतिष के अनुसार सूर्य हर माह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं. इस तरह से बारह राशियों में सूर्य एक वर्ष में अपना चक्र पूर्ण करते हैं. सूर्य को आरोग्य का देवता माना गया है. सूर्य के प्रकाश से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है. सूर्य को प्रतिदिन जल देने से जातक को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं. साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं. सूर्य देव की कृपा पाने और कुंडली में सूर्य की अनुकूलता बनाएं रखने के लिए प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए. इससे आपको समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है.

आप अपने जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं, लेकिन सूर्य देव को जल देते समय कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी होता है. इन बातों को ध्यान में रखकर यदि सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं तो जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सभी बिगड़े काम भी बनने लगते हैं. हर रविवार को सूर्य पूजन और सूर्य मंत्र का 108 बार जाप करने से लाभ मिलता है. ये सूर्य मंत्र आपकी समस्त मनोकामना पूर्ण करने में आपकी सहायता करते हैं. यह अनुभूत प्रयोग है. रविवार के दिन नीचे दिए गए मंत्रों में से जो भी मंत्र आसानी से याद हो सकें उसके द्वारा सूर्य देव का पूजन-अर्चन करें. फिर अपनी मनोकामना मन ही मन बोलें. भगवान सूर्य नारायण आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे.

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पढ़ें सूर्य ग्रह के 7 सरल मंत्र -
1. ॐ घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:

2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

3. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:



4. ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ

5. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः

6. ॐ सूर्याय नम: .

7. ॐ घृणि सूर्याय नम: .

इसके साथ ही अगर भाषा व उच्चारण शुद्ध हो तो आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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