Yashoda Jayanti 2021: कृष्ण की मैया यशोदा को श्री हरि ने दिया था ये आशीर्वाद, कथा से जानें

यशोदा जयंती की कथा (credit: instagram/rkushwah_07)

Yashoda Jayanti Date Shubh Muhurat Katha- यशोदा ने श्रीहरि की घोर तपस्या की, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें वर मांगने को कहा.

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    Yashoda Jayanti Date Shubh Muhurat Katha- आज भगवान कृष्ण की मैया यशोदा की जयंती है. हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है. यशोदा जयंती के दिन भक्त माता यशोदा और कृष्ण भगवान की पूजा अर्चना करते हैं और व्रत रहते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती के दिन व्रत रहने, पूजा-पाठ करने और कथा का पाठ करने से संतान की प्राप्ति होती है, गृह कलेश से मुक्ति मिलती है. जीवन में सुख, समृद्धि और शांति रहती है. आइए आज यशोदा जयंती पर पढ़ें पौराणिक कथा...

    यशोदा जयंती का शुभ मुहूर्त:
    षष्ठी तिथि प्रारंभ - 4 मार्च को रात 12 बजकर 21 मिनट से
    षष्ठी तिथि समाप्त - 4 मार्च को रात 9 बजकर 58 मिनट तक

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    यशोदा जयंती की पौराणिक कथा:

    पौराणिक कथा के अनुसार, यशोदा ने श्रीहरि की घोर तपस्या की, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें वर मांगने को कहा. यशोदा ने कहा हे ईश्वर! मेरी तपस्या तभी पूर्ण होगी जब आप मुझे, मेरे पुत्र रूप में प्राप्त होंगे. भगवान ने प्रसन्न होकर उन्हें कहा कि आने वाले काल में मैं वासुदेव एवं देवकी के घर मैं जन्म लूंगा लेकिन मुझे मातृत्व का सुख आपसे ही प्राप्त होगा.

    यशोदा को नंद की पत्नी कहा गया है. भागवत पुराण में यह कहा गया है देवकी के पुत्र भगवान श्री कृष्ण का जन्म देवकी के गर्भ से मथुरा के राजा कंस के कारागार में हुआ. कंस से रक्षा करने के लिए जब वासुदेव जन्म के बाद आधी रात में ही उन्हें यशोदा के घर गोकुल में छोड़ आए तो उनका पालन पोषण यशोदा ने किया.

    भारत के प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में बालक कृष्ण की लीलाओं के अनेक वर्णन मिलते हैं. जिनमें यशोदा को ब्रह्मांड के दर्शन, माखनचोरी और उसके आरोप में ओखल से बांध देने की घटनाओं का सूरदास ने सजीव वर्णन किया है. यशोदा ने बलराम के पालन पोषण की भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो रोहिणी के पुत्र और सुभद्रा के भाई थे. उनकी एक पुत्री का भी वर्णन मिलता है जिसका नाम एकांगा था.

    वसुश्रेष्ठ द्रोण और उनकी पत्नी धरा ने ब्रह्माजी से यह प्रार्थना की - 'देव! जब हम पृथ्वी पर जन्म लें तो भगवान श्री कृष्ण में हमारी अविचल भक्ति हो.' ब्रह्माजी ने 'तथास्तु' कहकर उन्हें वर दिया. इसी वर के प्रभाव से ब्रजमंडल में सुमुख नामक गोप की पत्नी पाटला के गर्भ से धरा का जन्म यशोदा के रूप में हुआ. और उनका विवाह नंद से हुआ. नंद पूर्व जन्म के द्रोण नामक वसु थे. भगवान श्री कृष्ण इन्हीं नंद-यशोदा के पुत्र बने. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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