प्राइवेट स्कूलों की फीस पर लगाम कसने की तैयारी, फी-एक्ट का ड्राफ़्ट तैयार, आप भी दे सकते हैं सुझाव

स्कूली शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने फ़ीस कमेटी का ड्राफ़्ट विभाग की एक मीटिंग में रखा.

स्कूली शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने फ़ीस कमेटी का ड्राफ़्ट विभाग की एक मीटिंग में रखा.

बुधवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री अरविंद पांडेय ने फ़ीस एक्ट का ड्राफ़्ट रखा.

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उत्तराखंड सरकार प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर एक बार फिर लगाम लगाने की तैयारी कर रही है. प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के शुरुआती एलानों में से एक प्राइवेट स्कूलों की फीस पर नियंत्रण करने के लिए सरकार फ़ीस एक्ट लाने की तैयारी कर रही है. सरकार स्कूलों के लिए एक फ़ीस स्ट्रक्चर तैयार करेगी और जो इसका पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी किया जाएगा.

NCERT की किताबें भी लागू हुईं

उत्तराखंड शिक्षा महकमा पिछले ढाई साल से एक प्रयोगशाला की तरह चल रहा है. कभी शिक्षकों की अटेंडेंस सेल्फ़ी से लगाने के आदेश आए, तो कभी उनकी ड्रेस लागू करने के. लेकिन सभी सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के प्रयोग की अभिभावकों ने प्रशंसा की है और कमियों के बावजूद इससे अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है, शिक्षा के नाम पर किताबों के कारोबार पर कुछ लगाम भी लगी है.



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अब शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने की दिशा में सबसे बड़ा कदम उठाने जा रहा है. शिक्षा विभाक का प्रभार संभालते ही अरविंद पांडे ने कहा था कि प्राइवेट स्कूलों की फ़ीस को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाया जाएगा. अब इस दिशा में कदम बढ़ाया गया है. बुधवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री अरविंद पांडेय ने इसका मसौदा रखा.

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इस मसौदे के अनुसार एक फीस एक्ट बनाकर प्री प्राइमरी, प्राइमरी, जूनियर सैकेंडरी और सीनियर सैकेंडरी कक्षाओं के लिए अधिकतम शुल्क निर्धारित किया जाएगा.

मसौदे की ख़ास बातें 

  • ज़िला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में फ़ी-रेगुलेटरी कमेटी का गठन होगा.
  • कमेटी में डीएम के अलावा मुख्य शिक्षा अधिकारी, स्वतंत्र चार्टेड अकाउंटेंट, PWD के अधिशासी अभियंता, एक अभिभावक और किसी प्राइवेट विद्यालय के प्रबंधक या प्रधानाचार्य होंगे.
  • ये कमेटी स्कूलों में जाकर निरीक्षण करेगी और वहां का फ़ीस स्ट्रक्चर तय करेगी.
  • फ़ी स्ट्रक्चर का पालन न करने वाले स्कूल को पहली बार दोषी पाए जाने पर एक लाख रुपये, दूसरी बार दोषी पाए जाने पर पांच लाख रुपये. और तीसरी बार दोषी पाए जाने पर मान्यता रद्द की जाएगी.
  • ज़िला स्तरीय कमेटी के निर्णय से असहमत होने पर स्टेट अपीलीय अथॉरिटी में अपील की जा सकेगी.
  • स्टेट अपीलीय अथॉरिटी सचिव विद्यालयी शिक्षा की अध्यक्षता में गठित होगी.

स्कूलों में हलचल 

हालांकि यह काम आसान नहीं है. फ़ीस एक्ट लाने की सूचना भर से ही प्राइवेट स्कूल संचालकों में हलचल शुरू हो गई है. दून इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल दिनेश बर्तवाल कहते हैं कि सरसरी नज़र डालने पर फ़ीस एक्ट का मसौदा बहुत जटिल लग रहा है और यह प्राइवेट स्कूलों पर मनमानी थोपना लगता है. हालांकि वह यह भी कहते हैं इसके ठीक से अध्ययन और कानूनी सलाह लेने के बाद ही वह कोई राय व्यक्त कर पाएंगे.

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शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय का दावा है कि जुलाई तक फ़ीस एक्ट अस्तित्व में आ जाएगा. एक्ट के लिए आम लोगों से भी सुझाव मांगे गए हैं. अगले पंद्रह दिन तक आम जनता हो या स्कूल, कोई भी  ऑनलाइन अपनी शिकायत, सुझाव दर्ज करवा सकता है.

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