JNU दाखिलों में दिव्यांग छात्रों को 5% आरक्षण सुनिश्चित करें: दिल्ली HC

जेएनयू 2020-21 शैक्षणिक वर्ष में सभी पाठ्यक्रमों में इसे मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है.  
जेएनयू 2020-21 शैक्षणिक वर्ष में सभी पाठ्यक्रमों में इसे मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है.  

जुलाई में जेएनयू ने अदालत से कहा था कि उसने दिव्यांग छात्रों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का कभी उल्लंघन नहीं किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 4:19 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से कहा कि दिव्यांग श्रेणी के लिए सीटें आरक्षित करने के संबंध में वह चाहे कोई भी प्रक्रिया अपनाए लेकिन अंतिम दाखिले में पांच प्रतिशत सीटें दिव्यांग छात्रों के लिए होनी चाहिए.

पांच प्रतिशत सीटों पर आरक्षण का पालन हो
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने विश्वविद्यालय से कहा, ‘‘दाखिले के अंत में जब आप लोगों की गिनती करें तो पांच प्रतिशत सीटों पर आरक्षण का पालन होना चाहिए. आप ऐसा कर रहे हैं तो ठीक है.’’

दिव्यांग छात्रों के लिए पांच प्रतिशत सीटें शामिल
विश्वविद्यालय ने अदालत को आश्वस्त किया कि दाखिला के अंत में दिव्यांग छात्रों के लिए पांच प्रतिशत सीटों को शामिल किया जा रहा है. जेएनयू की तरफ से पेश केंद्र सरकार की स्थायी वकील मोनिका अरोड़ा ने कहा कि दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण मुहैया कराने की प्रतिबद्धता है.



आरक्षण देने के लक्ष्य को वह पूरा नहीं कर पा रहे
इससे पहले विश्वविद्यालय ने स्वीकार किया था कि कानून के तहत दिव्यांग छात्रों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने के लक्ष्य को वह पूरा नहीं कर पा रहा है. विश्वविद्यालय ने 13 अक्टूबर को अदालत के सामने माना था कि दाखिले में दिव्यांग व्यक्ति अधिकार (आरपीडब्ल्यूडी) कानून के तहत दिव्यांग छात्रों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने का पालन नहीं हो पाया.

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2020-21 शैक्षणिक वर्ष में सभी पाठ्यक्रमों में इसे मुहैया कराएं
जुलाई में जेएनयू ने अदालत से कहा था कि उसने दिव्यांग छात्रों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का कभी उल्लंघन नहीं किया और वह 2020-21 शैक्षणिक वर्ष में सभी पाठ्यक्रमों में इसे मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
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