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JNU छात्रों की मांगों को मनवाने पर अड़ा ABVP, सात द‍िन से जारी सत्याग्रह आंदोलन, रेक्‍टर का क‍िया घेराव

JNU छात्रों की मांगों को मनवाने पर अड़ा ABVP, सात द‍िन से जारी सत्याग्रह आंदोलन, रेक्‍टर का क‍िया घेराव

अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन कर रहे छात्रों ने रेक्‍टर एके दुबे का घेराव क‍िया और उनकी गाड़ी के सामने आकर खड़े हो गए.

अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन कर रहे छात्रों ने रेक्‍टर एके दुबे का घेराव क‍िया और उनकी गाड़ी के सामने आकर खड़े हो गए.

ABVP JNU Satyagraha Andolan: वर्तमान समय में जेएनयू प्रशासन छात्रों के तीन मुद्दों पर फेल साबित हुआ है. विद्यार्थियों को हॉस्टल अलॉट करने की प्रक्रिया से लेकर उनकी प्लेट में ठीक भोजन हो, उसके सिर पर ऐसी छत हो जिसके गिरने का डर विद्यार्थी को हर समय न सता रहा हो, और पीने का साफ पानी तो मौलिक अधिकार है, उसका भी हनन इस विश्वविद्यालय में हो रहा है.

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नई दिल्ली. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की जेएनयू इकाई जेएनयू प्रशासन के छात्रों के प्रति नकारात्मक रवैये के ख‍िलाफ गत 12 अगस्‍त से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन कर रही है. आज छात्रों ने रेक्‍टर एके दुबे (JNU Rector AK Dubey) का घेराव भी क‍िया और उनकी गाड़ी के सामने आकर खड़े हो गए. इसके बाद उनको गाड़ी से उतरकर व‍िरोध कर रहे छात्रों से बातचीत की. लेक‍िन वो अपनी मांगों पर अड़े रहे.

एबीवीपी का मानना का है क‍ि हॉस्टल, फेलोशिप और पढ़ाई तीनों ही एक विद्यार्थी के लिए आधारभूत मुद्दा और मांग हैं. वर्तमान समय में जेएनयू प्रशासन (JNU Administration) इन तीनों ही मुद्दों पर फेल साबित हुआ है. विद्यार्थियों को हॉस्टल अलॉट करने की प्रक्रिया से लेकर उनकी प्लेट में ठीक भोजन हो, उसके सिर पर ऐसी छत हो जिसके गिरने का डर विद्यार्थी को हर समय न सता रहा हो, और पीने का साफ पानी तो मौलिक अधिकार है, उसका भी हनन इस विश्वविद्यालय में हो रहा है.

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छात्रों ने रेक्‍टर एके दुबे का घेराव भी क‍िया और उनकी गाड़ी के सामने आकर खड़े हो गए.

विश्वविद्यालय प्रशासन पिछले कई महीनों से यही रट लगा रहा है क‍ि उसे 56 करोड़ रुपये भारत सरकार से छात्रावास मरम्मत हेतु मिले हैं. वे 56 करोड़ कहां हैं. इस बात पर जेएनयू प्रशासन को मानो साप सूंघ लेता है.

छात्रावास के मुद्दे के अलावा जेएनयू प्रशासन के पास छात्रों को एमसीएम और फेलोशिप देने के लिए पूरे साल फंड का अभाव ही नजर आता है. इसके अलावा प्रशासन के पास ऑफलाइन क्लास का भी कोई ब्लू प्रिंट नहीं है. जेएनयू के छात्रों के लिए सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि ऐसे मुश्किल घड़ी में जेएनयूएसयू एकदम चुप्पी धारण किए हुए जेएनयू प्रशासन को अपना समर्थन दे रही है.

ABVP के जेएनयू इकाई अध्यक्ष रोहित कुमार का कहना है कि जेएनयू प्रशासन और प्रशासन में बैठे आला अधिकारी को छात्रों के हित की जरा भी चिंता नहीं है. इस देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय को अपनी नाकामी की वजह से ये लोग धरातल पर ले आए हैं. जेएनयू विश्वविद्यालय जो अपने शिक्षा के स्तर को लेकर विश्व भर में प्रसिद्ध है वहां पर छात्रों को उनके मौलिक अधिकार भी नहीं मिल रहे हैं.

रोहित का कहना है क‍ि नकारे जेएनयूएसयू और जेएनयू प्रशासन की मिलीभगत का खामियाजा आम छात्रों को उठाना पड़ रहा है. जब तक जेएनयू प्रशासन छात्रों के मुद्दों का समाधान नहीं निकालता, विद्यार्थी परिषद का सत्याग्रह आंदोलन जारी रहेगा.

हॉस्‍टल के र‍िनोवेशन के ल‍िए आए 56 करोड़, नहीं हुआ काम
उधर, एबीवीपी जेएनयू यून‍िट के मंत्री उमेश चंद्र अजमीरा का कहना है कि पिछले 6 महीने से जेएनयू प्रशासन छात्रों को यह आश्वासन दे रहा है कि ₹56 करोड़ हॉस्टल रिनोवेशन के लिए आए हैं. लेकिन अभी तक हॉस्टल रिनोवेशन के नाम पर पूरे जेएनयू में कहीं पर भी काम शुरू नहीं हुआ है. जहां पर मौजूदा छात्रों को रहने के लिए हॉस्टल नहीं है और जेएनयू प्रशासन को नए हॉस्टल का निर्माण करना चाहिए, वहां पर प्रशासन की नाकामी के चलते वर्तमान हॉस्टल का रिनोवेशन भी नहीं हो पा रहा है.

अजमीरा का कहना है क‍ि व‍िद्यार्थी परिषद हमेशा से छात्र हित के लिए खड़ा रहा है. जेएनयू में चाहे वाईफाई की सुविधा हो, कैंपस के अंदर ई रिक्शा हो या नए हॉस्टल का निर्माण हो, ये सभी सकारात्मक परिणाम परिषद के संघर्ष से ही सफल हो सका है. आगे भी छात्रहितों के लिए विद्यार्थी परिषद छात्रों के बेहतरी के लिए सदैव खड़ा रहेगा.

व‍िव‍ि के न‍िवास से दो एनजीओ के संचालन के आरोपों से घ‍िरे जेएनयू रेक्‍टर
बताते चलें क‍ि हाल ही में जेएनयू के रेक्टर के उपर विश्वविद्यालय के निवास पते से दो एनजीओ को संचाल‍ित करने के आरोप लगे थे. इस मामले के सामने आने के बाद इसको सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है. एबीवीपी लगातार कई दिनों से इस मामले के साथ-साथ सभी संबंध‍ित समस्याओं पर प्रशासन से जवाब मांग रहा है. इस पर न तो वाइस चांसलर और न ही रेक्टर कोई जवाब देने को तैयार हैं. महीनों से छात्रों की फेलोशिप नहीं आने से छात्र परेशान हैं. इस मामले पर जेएनयू के सामान्य छात्र भी एबीवीपी के समर्थन में आ गए हैं और उन्होंने भी रेक्टर से सवाल किया.

Tags: Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP), Delhi news, Education news, Jnu

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