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अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस स्पेशल :- आगरा विश्वविद्यालय बना रहा है एक ऐसा सिस्टम जिसमें बोलने से टाइप होगी मातृ?

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस स्पेशल :- आगरा विश्वविद्यालय बना रहा है एक ऐसा सिस्टम जिसमें बोलने से टाइप होगी मातृ?

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आगरा:-डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय भाषा विज्ञान विभाग में सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर सेमिनार का आयोजन किया गया.जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार ने भाग लिया.ईएमआई विभाग परिसर के सामने अंत?

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    आगरा:-डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय भाषा विज्ञान विभाग में सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर सेमिनार का आयोजन किया गया.जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार ने भाग लिया.ईएमआई विभाग परिसर के सामने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर एक प्रदर्शनी भी लगाई गई.जिसमें मातृभाषा के विकास के पोस्टर लगे हुए थे.

    मातृ भाषा के विकास पर हुई परिचर्चा
    सेमिनार को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि हम जिस जगह रहते हैं वहां की कोई ना कोई एक मातृभाषा होती है.उस मातृभाषा की प्रसिद्धि कम ना हो.किसी भी समाज का विकास उसकी मातृभाषा पर भी निर्भर होता है.समाज मजबूत होता है तो वहां की भाषा भी मजबूत होती है.भारत ऐसा देश है जहां पर हर 10 किलोमीटर पर भाषा बदलती है.बदलते दौर में लोगों को अपनी मातृभाषा पर अभिमान करना चाहिए.हम सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि क्षेत्र की भाषाएं कहीं गुम न हो ,इन्हें संजोने का हमारा ही काम है .

    आगरा विश्वविद्यालय कर रहा है स्पीक टू टेक्स्ट पर काम
    आगरा के कुलपति विनय कुमार ने बताया कि आगरा विश्वविद्यालय के भाषा विज्ञान डिपार्टमेंट के तहत एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है जिसमें स्पीक टू टेक्स्ट से भाषा के शब्द टाइप होंगे.यानी कि इस सिस्टम के द्वारा मातृभाषा को बोलने से लिखा जा सकता है.इस सिस्टम में अवधि, भोजपुरी, मगदी भाषाओं के शब्दकोश होंगे. जिससे मातृभाषा बोलने वालों को अब संदेश भेजने के लिए टाइप करने की जरूरत नहीं होगी.केवल मुंह से बोलने पर ही इन भाषाओं के शब्द टाइप हो जाया करेंगे.

    निज भाषा बिन ज्ञान के मिटे न हिय को सूल
    ईएमआई संस्था के निर्देशक डॉ प्रदीप श्रीधर ने कहा कि आप विश्व के किसी भी कोने में रहते हो.लेकिन आपकी मातृभाषा से आपका गहरा लगाव होता है.इसलिए हमारे देश के कवियों ने भी लिखा है कि बिना अपनी निज भाषा के ज्ञान के अपनी मन की पीड़ा खत्म नहीं होती.इसलिए हमें अपनी मातृभाषा पर अभिमान करना चाहिए.युवाओं तक इस भाषा को पहुंचाना चाहिए.बिना मातृभाषा के समाज का विकास नहीं हो सकता.इसलिए जब भी मौका मिले अपनी मातृभाषा में ही बात करें .

    रिपोर्ट :- हरीकान्त शर्मा

    Tags: Jhansi news

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