आंध्र प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों, इंटरमीडिएट कॉलेजों को आदेश, फीस में 30% करें कटौती

फीस में 30 प्रतिशत की कटौती की घोषणा.
फीस में 30 प्रतिशत की कटौती की घोषणा.

राज्य में शैक्षणिक संस्थान 22 मार्च से बंद हैं. 2020-21 के शैक्षणिक वर्ष में अब तक इसे फिर से खोला नहीं गया है. स्कूलों के लिए दैनिक परिचालन और रखरखाव की लागत बहुत कम हो गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 31, 2020, 8:26 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोनावायरस महामारी में आर्थिक रूप से प्रभावित लोगों को राहत देने के उद्देश्य से, आंध्र प्रदेश सरकार ने निजी सहायता प्राप्त स्कूलों (private unaided schools) और इंटरमीडिएट कॉलेजों में फीस में 30 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की है.

 शुल्क में 30 प्रतिशत की कमी का निर्णय 
प्रमुख सचिव बी राजशेखर ने कहा कि मामले की सावधानीपूर्वक जांच और आंध्र प्रदेश स्कूल शिक्षा नियामक निगरानी आयोग (APSERMC) की सिफारिशों के बाद, राज्य ने शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए शिक्षण शुल्क में 30 प्रतिशत की कमी का निर्णय लिया है.

2019-20 के शैक्षणिक सत्र में शुल्क का 70 प्रतिशत ले सकते हैं
आर्थिक रूप से अक्षम हो चुके माता-पिता की दुर्दशा को देखते हुए, 2019 के अधिनियम 21 की धारा 9 के तहत आयोग ने 2020-21 सत्र के लिए ट्यूशन फीस में 30 प्रतिशत की कटौती की सिफारिश की है. सभी निजी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल और इंटरमीडिएट कॉलेज 2019-20 के शैक्षणिक सत्र में शुल्क का केवल 70 प्रतिशत ही ले सकते हैं.



रखरखाव की लागत निश्चित रूप कई कारणों से घटी
राज्य सरकार ने निदेशक, स्कूल शिक्षा (डीएसई) और आयुक्त, इंटरमीडिएट शिक्षा (सीआईई) की भी राय ली, उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कटौती की आवश्यकता थी. यह प्रबंधन को पर्याप्त रूप से प्रभावित नहीं कर सकता, क्योंकि कुल परिचालन और रखरखाव की लागत निश्चित रूप कई कारणों से घट गई है.

शैक्षणिक संस्थान 22 मार्च से बंद हैं
अधिकारी ने कहा कि राज्य में शैक्षणिक संस्थान 22 मार्च से बंद हैं. 2020-21 के शैक्षणिक वर्ष में अब तक इसे फिर से खोला नहीं गया है. स्कूलों के लिए दैनिक परिचालन और रखरखाव की लागत बहुत कम हो गई है.

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परिचालन और रखरखाव खर्च भी न्यूनतम
राजशेखर ने कहा, स्कूलों में सभी शैक्षणिक और पाठ्येतर गतिविधियां इन महीनों में आयोजित नहीं की गई हैं. इन सभी महीनों में स्कूल बसों का परिचालन और रखरखाव खर्च भी न्यूनतम होना चाहिए.
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