Pariksha Pe Charcha 2021: PM मोदी बोले- कोरोना ने समझाया किसी को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए

प्रधानमंत्री मोदी साल 2018 से परीक्षा से पहले छात्रों से चर्चा करते रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी साल 2018 से परीक्षा से पहले छात्रों से चर्चा करते रहे हैं.

Pariksha Pe Charcha 2021: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के जरिए हर साल छात्रों से संवाद करते हैं और उन्हें परीक्षा के तनाव को दूर करने के उपाय सुझाते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 8, 2021, 12:14 AM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बुधवार को कहा कि कोविड-19 के कारण छात्रों ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण साल तो गंवा दिया लेकिन इस महामारी के कारण उन्हें बहुत कुछ सीख भी मिली. ‘‘परीक्षा पे चर्चा’’ के ताजा संस्करण में डिजिटल माध्यम से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कोविड-19 ने सभी को विपरीत परिस्थितियों में जीवन जीने की सीख भी दी है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण बच्चों और युवाओं को बहुत नुकसान उठाना पड़ा किंतु इस महामारी ने संयुक्त परिवार की ताकत और बच्चों के जीवन निर्माण में उसकी भूमिका का भी बखूबी एहसास कराया.

कोरोना महामारी के चलते छात्रों को हुए नुकसान संबंधी एक सवाल का जवाब देते हुए मोदी ने कहा, ‘‘हम कह सकते हैं कि कोविड-19 के कारण छात्रों ने एक साल गंवा दिया लेकिन इस महामारी के चलते उन्हें कई सीख भी मिलीं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘महामारी ने हमें अचानक हुई घटना से लड़ना सिखाया. लोगों ने महसूस किया कि नित्य स्कूल और कार्यालय जाने को ही हमें नियति नहीं मान लेना चाहिए.’’

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प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘कोरोना काल में यदि हमने बहुत कुछ खोया है तो बहुत कुछ पाया भी है. इससे मिली सीख को हमें जीवन पर्यंत याद रखना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि कोरोना काल की सबसे पहली सीख तो यही है कि बच्चों ने इस दौरान जिन लोगों की कमी महसूस की, उन लोगों की अपने जीवन में भूमिका के महत्व का एहसास उन्हें हुआ.
उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना काल में एक और बात यह भी हुई कि हमने परिवार में एक दूसरे को ज्यादा नजदीक से समझा है. कोरोना ने सामाजिक दूरी के लिए मजबूर किया लेकिन परिवारों में भावनात्मक लगाव को भी इसने मजबूत किया. कोरोना काल ने यह भी दिखाया है कि एक संयुक्त परिवार की ताकत क्या होती है और घर के बच्चों के जीवन निर्माण में उनकी कितनी भूमिका होती है.’’

प्रधानमंत्री ने समाज शास्त्र से जुड़े शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों से अनुरोध किया कि उन्हें कोरोना संकट से समाज में, जीवन में आए बदलावों और इस संकट का मुकाबला करने में संयुक्त परिवारों की भूमिका के बारे में अध्ययन या शोध करना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी के प्रसार को देखते हुए पिछले साल मार्च महीने में देश भर के सभी स्कूल बंद कर दिए गए थे. बच्चों की पढ़ाई पर इसका असर ना पड़े, इसके लिए ऑनलाइन पढ़ाई की शुरुआत हुई.



कोरोना वायरस संक्रमण के मामले जब देश में कम हुए तो धीरे-धीरे स्कूल खुलने लगे. लेकिन एक बार फिर इस महामारी के तीव्र प्रसार को देखते हुए स्कूल पुन: बंद करना पड़ा.

कक्षा दसवीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं सामान्यत: फरवरी-मार्च में होती हैं लेकिन कोविड-19 के मद्देनजर इस बार इन्हें मई-जून में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है.

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