CBSE 10वीं बोर्ड के रिजल्ट की मूल्यांकन प्रक्रिया पर स्कूलों ने दर्ज की आपत्ती

12वीं की परीक्षाएं कैंसल की जाएं या नहीं, इस पर शिक्षा मंत्री ने सलाह मांगी है.

12वीं की परीक्षाएं कैंसल की जाएं या नहीं, इस पर शिक्षा मंत्री ने सलाह मांगी है.

एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके भट्टाचार्य ने कहा, 'परीक्षाएं जिस माहौल में कराई गईं, वो हालात काफी अलग हैं. प्रस्तावित मार्क्स कैलकुलेशन फॉर्मूले से खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के कुछ प्रतिभाशाली छात्रों के साथ अन्याय होगा.

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नई दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से 10वीं का रिजल्ट 20 जून को जारी किए जाने की घोषणा की जा चुकी है. सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा 2021 के प्रत्येक विषय के लिए अधिकतम 100 अंकों का मूल्यांकन किया जाएगा. इसमें 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के लिए और 80 अंक साल के अंत में बोर्ड परीक्षा के लिए आवंटित किए जाएंगे. स्कूल-आधारित मूल्यांकन और वेटेज के लिए जिन परीक्षाओं का उपयोग किया जाएगा, उनमें पीरियोडिक टेस्ट या यूनिट टेस्ट (10 अंक), अर्धवार्षिक या मध्यावधि परीक्षा (30 अंक) और प्री-बोर्ड परीक्षा (40 अंक) शामिल हैं.

राष्ट्रीय राजधानी के कई स्कूलों ने 10वीं परीक्षा रद्द करने के फैसले को अनुचित करार दिया है. उन्होंने वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धति पर चिंता जताई.

हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक दिल्ली के 400 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों की एक संस्था ने सीबीएसई से मार्किंग स्कीम की समीक्षा करने का अनुरोध किया है. सीबीएसई ने स्पेशल मार्किंग स्कीम जारी कर कहा था, छात्रों का रिजल्ट स्कूलों द्वारा आयोजित यूनिट टेस्ट, छमाही परीक्षा और प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर निकाला जाएगा.

पढ़ें स्कूलों ने मार्किंग स्कीम पर क्या कहा
हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, दिल्ली के गैर-सरकारी सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की एक्शन कमिटी ने कहा, स्कूलों के पिछले तीन वर्षों के रिजल्ट के आधार पर मार्किंग स्कीम सेट किया जाना अनुचित और अव्यावहारिक है क्योंकि अलग अलग स्कूल के हर बैच में छात्रों की संख्या अलग अलग होती है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके भट्टाचार्य ने कहा, 'परीक्षाएं जिस माहौल में कराई गईं, वो हालात काफी अलग हैं. प्रस्तावित मार्क्स कैलकुलेशन फॉर्मूले से खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के कुछ प्रतिभाशाली छात्रों के साथ अन्याय होगा.

कई सरकारी स्कूलों के अधिकारियों ने भी सीबीएसई 10वीं रिजल्ट फॉर्मूले पर आपत्ति जाहिर की है. पश्चिमी दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि बोर्ड ने वर्ष 2017-18 को उनका रेफरेंस ईयर माना है. तब हमारा रिजल्ट 65 फीसदी था और हमारे स्कूल में साइंस में 126 छात्रों ने 26 फीसदी से कम मार्क्स हासिल किए थे.



क्या बोले सीबीएसई अधिकारी

सीबीएसई अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने रिजल्ट निकालने के लिए सबसे प्रैक्टिकल फॉर्मूला चुना है. अधिकारी ने कहा, 'हमारे पास कुछ स्कूलों से ऐसी रिपोर्ट्स थीं कि स्टूडेंट्स ने ऑनलाइन एग्जाम में काफी अधिक अंक हासिल किए जबकि प्री-बोर्ड ऑफलाइन एग्जाम में उनका स्कोर कम रहा.

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